February 17, 2026


काशीपुर। मास्टर इंटरनेशनल स्कूल में आज विद्यालय प्रांगण में जुडो ड्रिल का भव्य एवं प्रेरणादायक प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की प्रबंधिका श्रीमती शिल्पी गर्ग एवं प्रधानाचार्य डॉ. गौरव गर्ग की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मरक्षा की भावना, शारीरिक सुदृढ़ता, मानसिक संतुलन तथा अनुशासन के गुणों का विकास करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के जुडो प्रशिक्षक द्वारा विद्यार्थियों को जुडो के महत्व एवं उसके इतिहास के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि जुडो केवल एक खेल नहीं, बल्कि आत्मरक्षा की प्रभावी विधा है जो बच्चों को आत्मविश्वासी, सजग और सशक्त बनती है।
कार्यक्रम में कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। सभी छात्र-छात्राएं सफेद जुडो ड्रेस (गी) में सुसज्जित होकर मैदान में उतरे। उनके चेहरों पर आत्मविश्वास और उत्साह स्पष्ट झलक रहा था। ड्रिल की शुरुआत वार्म-अप एक्सरसाइज से हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने समन्वित ढंग से स्ट्रेचिंग, रनिंग और बैलेंसिंग अभ्यास प्रस्तुत किया।
इसके बाद छात्रों ने जुडो की विभिन्न तकनीकों जैसे गिरने की सही विधि (फॉल ब्रेकिंग), पकड़ से बचने की तकनीक, फेंकने की कला और आत्मरक्षा के दांव-पेचों का शानदार प्रदर्शन किया। हर तकनीक को बड़े ही संयम और सटीकता के साथ प्रस्तुत किया गया। अभिभावकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से छात्रों का उत्साहवर्धन किया।
आत्मरक्षा का संदेश
जुडो ड्रिल के दौरान विशेष रूप से छात्राओं द्वारा आत्मरक्षा तकनीकों का प्रदर्शन सराहनीय रहा। उन्होंने यह दर्शाया कि यदि सही प्रशिक्षण मिले तो बेटियाँ भी स्वयं को किसी भी विपरीत परिस्थिति में सुरक्षित रख सकती हैं। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आज के समय में आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्रत्येक छात्र-छात्रा के लिए आवश्यक है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. गौरव गर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास ही वास्तविक शिक्षा है। उन्होंने कहा कि जुडो जैसे खेल बच्चों में आत्मबल, धैर्य, संयम और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करते हैं।
प्रबंधिका श्रीमती शिल्पी गर्ग ने भी अपने उद्बोधन में कहा कि विद्यालय का उद्देश्य बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि आज की बदलती परिस्थितियों में आत्मरक्षा प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने जुडो प्रशिक्षक और विद्यार्थियों की मेहनत की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जलती हुई टाइल्स तोड़ना रहा। कक्षा 7 के मोहम्मद अली अब्बास तथा कक्षा 8 की यशिका आर्य ने जलती हुई पाँच-पाँच टाइल्स तोड़कर उपस्थित अभिभावकों को आश्चर्यचकित कर दिया। दोनों विद्यार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास और संयम के साथ यह प्रदर्शन किया, जिसे देखकर सभी ने तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया।
इसके अतिरिक्त गोरांश उपाध्याय, वंश चौहान, शिव शर्मा, योगांश गर्ग, आरोही अरोरा, अनन्या घनसेला, दक्ष चंद्रा, दक्ष प्रिय तथा शिवांश तिवारी ने भी चार-चार टाइल्स तोड़कर अपनी दक्षता और कठोर अभ्यास का परिचय दिया।
इस अवसर पर जुडो कोच आरती राणा का विशेष योगदान रहा। उनके कुशल मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास और प्रेरणा के कारण ही विद्यार्थियों ने यह साहसिक प्रदर्शन सफलतापूर्वक किया। कोच आरती राणा ने कहा कि नियमित प्रशिक्षण और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है।
कार्यक्रम में समूह ड्रिल , जिसमें लगभग 50 विद्यार्थियों ने एक साथ तालमेल के साथ विभिन्न जुडो मूव्स का प्रदर्शन किया। उनकी एकरूपता, अनुशासन और संतुलन ने सभी को प्रभावित किया। मैदान में एक साथ गूंजती उनकी आवाज़ और सटीक क्रियान्वयन ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
इसके अतिरिक्त कुछ विद्यार्थियों ने लाइव मुकाबले का प्रदर्शन भी किया, जिसमें उन्होंने नियंत्रित तरीके से तकनीकों का प्रयोग कर दर्शाया कि जुडो में शक्ति से अधिक तकनीक और संतुलन का महत्व है।
अभिभावकों ने की सराहना
कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों ने विद्यालय के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उनका कहना था कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं। कई अभिभावकों ने कहा कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से जुडो प्रशिक्षण दिलाने के लिए प्रेरित करेंगे।
खेल और शिक्षा का संतुलन
विद्यालय प्रशासन का मानना है कि खेल और शिक्षा का संतुलन बच्चों के समग्र विकास के लिए अनिवार्य है। इसी उद्देश्य से विद्यालय समय-समय पर विभिन्न खेल गतिविधियों, योग, कराटे और जुडो प्रशिक्षण का आयोजन करता रहता है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रशासन ने सभी प्रतिभागियों और कोच की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। जुडो ड्रिल के इस प्रदर्शन ने विद्यार्थियों में आत्मरक्षा के प्रति जागरूकता और आत्मबल को और अधिक सुदृढ़ किया।
कई विद्यार्थियों ने बताया कि इस प्रशिक्षण से उन्हें न केवल शारीरिक मजबूती मिली है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में भाग लेने का सपना देख रहे हैं।
मास्टर इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित जुडो ड्रिल प्रदर्शन ने यह सिद्ध कर दिया कि विद्यालय अपने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस कार्यक्रम ने छात्रों को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक किया और समाज को यह संदेश दिया कि शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक प्रशिक्षण भी उतना ही आवश्यक है।

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