

काशीपुर। सब्जी मंडी में किसानों की उपज के लिए निर्मित नीलामी चबूतरे व अधिनियम के उल्लंघन और किसानों के हितों की अनदेखी करने को लेकर सीएम पोर्टल पर व सीएम को भेजे शिकायती पत्र के मामले में मंडी समिति के महामंत्री ने प्रेसवार्ता कर सभी आरोपों को निराधार बताया है। मण्डी समिति गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान उत्तराखंड मंडी समिति संघ के महामंत्री पूरन सिंह ने कहा कि सब्जी मण्डी में नीलामी चबूतरे से ही किराया वसूल हो रहा है, तो अब इसकी शिकायत क्यों हो रही है? कहा कि सहायक लेखाधिकारी का पदोन्नति चैनल मण्डी सचिव पद नहीं हैं किन्तु मण्डी समिति के सचिव पद का दायित्व सहायक लेखाधिकारी का सौंपा गया है। इस सम्बन्ध में स्पष्ट करना है कि उत्तराखण्ड गठन से लगातार सचिव पद का दायित्व अनेक लोगों को सौंपा गया जैसे लेखाधिकारी मण्डी परिषद को मण्डी समिति, हल्द्वानी, कैशियर/लेखाकार को मण्डी समिति, मंगलौर गन्ना विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आये सुपरवाईजर को मण्डी समिति, ऋषिकेश, कोटद्वार एवं चमोली, कम्प्यूटर आपरेटर को मण्डी समिति, चमोली का सचिव प्रभार दिया गया है। जैसा कि पत्र में बताया गया है कि मंडी समितियों की विधि में है कि सचिव के लिए दो वर्ष का कृषि डिप्लोमा या कृषि से इंटरमीडिट के साथ भारत सरकार की ओर से संचालित मंडी सचिव प्रशिक्षण प्राप्त किया हो। इस सम्बन्ध में स्पष्ट करना है कि उत्तराखण्ड की मण्डी समितियों में कार्यरत किसी सचिव के पास यह योग्यता नहीं है, तो क्या सभी सचिव पद योग्य नहीं हैं? सचिव पद पर रहे कार्मिकों के पास भी संदर्भित योग्यता और प्रशिक्षण नहीं था। मण्डी सचिव पद पर तैनाती का अधिकार प्रबन्ध निदेशक/महाप्रबन्धक, विपणन बोर्ड को है और उनके द्वारा ही सभी समितियों में नियमानुसार सचिव पद पर तैनाती की जाती है। कृषि उत्पाद विपणन समिति की कार्यप्रणाली का भी उल्लेख किया गया है। तीन मण्डियों की विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ही आशा गोस्वामी को दायित्व दिया गया है। उल्लेखनीय है कि जिन लोगों द्वारा यह आरोप लगाये जा रहे हैं, उन्हें सम्भवतः न तो अधिनियम का ज्ञान है और न ही उपविधि की जानकारी। उनके द्वारा केवल दूसरे लोगों के द्वारा लिखे हुए पत्रों पर हस्ताक्षर किये जा रहे हैं। यही नहीं, उत्तराखण्ड गठन के बाद अनेकों यार्डमैन, सुरक्षा गार्ड, रसोईया, माली, वाटरमैन, स्वच्छक के पदों को समाप्त करके मण्डी सहायक पद पर पद परिवर्तन किया गया है, जिनको आज तक भी सेवा लाभ प्राप्त नहीं हुए हैं। उनको इनका भी संज्ञान लेना चाहिए कि इनको क्यों नहीं सेवा लाभ प्राप्त हुए? जिन 10 लोगों के मण्डी सहायक पद पर 2017 में प्रोन्नति हुई उनको आज तक नियमित करके वेतनवृद्धियां क्यों नहीं दी गई? मण्डी समितियों में अनेक ऐसे कार्मिक हैं, जो कि अपने पदों से भिन्न दूसरे पदों का कार्य कर रहे हैं, यह गैरकानूनी है या सही है, इस पर भी कुछ कहना चाहिए। कहा कि जिनकी नजर में यह कार्य अगर गैरकानूनी है, तो उन्हें कानून की शरण में जाना चाहिए।

जुगनू खान
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