February 15, 2026
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काशीपुर। शांत माहौल में शिक्षा देने वाले स्कूल परिसर में उस वक्त सनसनी फैल गई जब कक्षा 9 का एक छात्र अपने ही शिक्षक पर गोली चला बैठा। घटना बुद्धवार को कुंडेश्वरी स्थित गुरु नानक स्कूल में हुई। गोली शिक्षक गगन सिंह के कंधे में लगी, जिससे वह घायल हो गए। गनीमत यह रही कि गोली किसी बड़ी जानलेवा चोट का कारण नहीं बनी। गोली चलने की आवाज सुनते ही पूरे विद्यालय में अफरा-तफरी मच गई। बच्चे चीखते-भागते नजर आए और स्कूल स्टाफ भी सहम गया। घायल शिक्षक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटना की जांच शुरू कर दी है और आरोपी छात्र की तलाश में टीम लगाई गई है। इस सनसनीखेज घटना से क्षेत्र के अन्य निजी स्कूलों में भी दहशत का माहौल है। पब्लिक स्कूल एसोसिएशन ने कड़ा आक्रोश जताते हुए जिले के सभी सीबीएसई बोर्ड मान्यता प्राप्त निजी पब्लिक स्कूलों को गुरुवार को बंद रखने का ऐलान किया है। यह घटना सिर्फ एक गोली चलने की वारदात नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और समाज के सामने खड़े गंभीर सवालों का आईना है। आखिर बच्चों के भीतर इतनी हिंसक प्रवृत्ति क्यों पनप रही है? क्या शिक्षा केवल किताबों तक सिमटकर रह गई है? विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों के मानसिक दबाव और गुस्से को संभालने के लिए नियमित काउंसलिंग अनिवार्य होनी चाहिए।माता-पिता को घर पर बच्चों के व्यवहार, उनके गुस्से और तनाव को समय रहते समझना होगा। यदि समय रहते बच्चों के मनोविज्ञान को नहीं समझा गया, तो आने वाले समय में ऐसे हादसे और भी भयावह हो सकते हैं। यह वारदात न सिर्फ काशीपुर, बल्कि पूरे उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी है। सवाल यह है कि क्या अब स्कूलों को पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों की मानसिक सेहत और सुरक्षा को लेकर भी ठोस कदम उठाने होंगे।

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