

ब्रह्मालीन श्री देवेंद्र शर्मा जी (निवासी कोशाम्बी कालोनी, काशीपुर) के देहावसान के पश्चात उनके पुत्र श्री कमल शर्मा जी, श्री पवन शर्मा जी ने देहदान व नेत्रदान की सहमति प्रदान कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
श्री देवेंद्र शर्मा जी अपने जीवनकाल में स्वयं धार्मिक व सेवा कार्यो में सलंग्न रहें एवम यह कार्य भी उनकी उसी प्रवर्ति के अनुरूप रहा।
श्री देवेंद्र शर्मा जी के ब्रह्मलीन होने के समाचार पर 1 सितंबर को परिवार जन ने वसुधैव कुटुम्बकम काशीपुर से संपर्क कर देहदान व नेत्रदान की इच्छा प्रकट की । वसुधैव कुटुम्बकम के संस्थापक सदस्यों की उपस्थिति में कागजी औपचारिकता पूरी कर नेत्रदान व देहदान की प्रकिया सम्पन्न हुई ।
संस्था के उपस्थित दायित्व धारियों ने बताया कि देहदान महर्षि दधीचि जी की महान परम्परा है । संस्था का एक वर्ष में 20 वा’ नेत्रदान संपन्न हुआ है । इस दुःख की घड़ी पर संस्था के संस्थापक सदस्य अजय अग्रवाल जी, प्रियांशु बंसल जी, सीए सचिन अग्रवाल जी ने उपस्थित रहते हुए महा दानी परिवार के प्रति आभार प्रकट किया व ईश्वर से दिवंगत आत्मा की चिर शांति की कामना की । इस देहदान व नेत्रदान में समाजसेवी व ब्राह्मण सभा से शैलेंद्र शर्मा जी, चक्रेश जैन जी, एडवोकेट आनंद रस्तोगी जी, नीरज अग्रवाल जी nbc बेयरिंग वालों का विशेष योगदान रहा ।
देहदान एक महान और परोपकारी कार्य है, जिसमें व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद अपने शरीर को चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए दान करता है। यह कार्य न केवल चिकित्सा विज्ञान की प्रगति में मदद करता है, बल्कि यह एक व्यक्ति के जीवन को भी सार्थक बना सकता है।
देहदान के कई लाभ हो सकते हैं:
- चिकित्सा शिक्षा में मदद: देहदान से चिकित्सा छात्रों को मानव शरीर की संरचना और कार्य को समझने में मदद मिलती है।
- अनुसंधान में योगदान: देहदान से वैज्ञानिक अनुसंधान में मदद मिलती है, जिससे नए उपचार और चिकित्सा पद्धतियों का विकास हो सकता है।
- समाज सेवा: देहदान एक समाजसेवी कार्य है, जिससे व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी समाज को लाभ पहुंच सकता है।
यदि आप देहदान के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं या देहदान करना चाहते हैं, तो आप अपने वसुधैव कुटुम्बकम् संस्था से
24×7📲 9837080678,9548799947
से संपर्क कर सकते हैं।

जुगनू खान
संपादक – जुगनू खबर
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