

ब्रह्मलीन श्रीमती प्रेम कुमारी जी के सुपुत्र सी ए सौरभ अग्रवाल जी एवं परिजनों की सहमति से वसुधैव कुटुम्बकम् काशीपुर के तत्वाधान में सी एल गुप्ता आई हॉस्पिटल की टीम ने कागजी कार्यवाही पूर्ण कर नेत्रदान की प्रक्रिया पूर्ण की ।
नेत्रदान के समय वसुधैव कुटुम्बकम् संस्था के सचिव प्रियांशु बंसल और संस्थापक सदस्य सचिन अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल मौजूद रहें। नेत्रदान प्रकल्प संयोजक सी ए सचिन अग्रवाल ने परिजनों के इस मानवीय निर्णय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनका हृदय से आभार प्रकट किया, यह नेत्रदान दो लोगों को रोशनी की नई उम्मीद देगा और समाज में नेत्रदान जैसे पुण्य कार्य के प्रति
जागरूकता भी बढ़ाएगा।
वसुधैव कुटुम्बकम् के संस्थापक सदस्य अंकुर अग्रवाल ने बताया कि नेत्रदान एक ऐसा दान है जो मृत्यु के बाद दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई दृष्टि प्रदान कर सकता है और एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों को देखने की क्षमता मिल सकती है।
22 वें नेत्रदान के अवसर पर संस्था के संस्थापक सदस्य अजय अग्रवाल जी, दीपक मित्तल जी, प्रियांशु बंसल जी ने उपस्थित रहते हुए दानी परिवार के प्रति आभार प्रकट किया व ईश्वर से दिवंगत आत्मा की चिर शांति की कामना की ।
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नेत्रदान के भ्रान्तियाँ और तथ्य —
कॉर्निया दान जीवनरक्षक और जीवनदायिनी हो सकता है।
- नेत्रदान मरणोपरांत ही किया जा सकता है।
दाता का सिर्फ कॉर्निया ही लिया जाता है। इस प्रक्रिया मे ं मात्र 15-20 मिनट ही लगते हैं।
कॉर्निया लेने के बाद मृत व्यक्ति का चेहरा विकृत नहीं होता है। कॉर्निया लेने गयी टीम मृत व्यक्ति के सम्मान व प्रियजनो ं की भावना का पूरा ध्यान रखती है।
एड्स, हेपेटाइटिस, ल्यूकेमिया आद ि जैस े रोगों से पीड़ित लोगों को छोड़ कर हर कोई नेत्रदान कर सकता है।
एक नेत्रदान से कम से कम दो व्यक्तियों को रौशनी दी जा सकती है।
नेत्र दान मौत से छह घंटे में होना चाहिए।
नेत्रदान के लिए परिवार की सहमति अनिवार्य है।

जुगनू खान
संपादक – जुगनू खबर
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