February 15, 2026
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काशीपुर। शहर में बड़ी संख्या में गायों के पालने वाले लोग हैं, जो अपने घरों में गायों को रख रहे हैं। लेकिन अधिकतम लोगों को गायों की कद्र सिर्फ जुबान पर ही होती है। यह सुबह शाम दुध निकालने के बाद उन्हें खुला छोड़ रहे हैं। ऐसे में धरातल पर गोवंशीय पशुओं की हालत दिन पर दिन बदतर हो रही है। शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेरों पर लावारिस गायों को मुंह मारते देखा जा सकता है। भूखी प्यासी ये गायें कभी सड़े गले खाद्य पदार्थ और प्लास्टिक की पन्नियां खाकर अपनी भूख मिटाती हैं और प्यास बुझाने के लिए कीचड़य़ुक्त गंदा पानी पीना इनकी मजबूरी बन गई है। काशीपुर शहर की ही बात करें तो यहां वर्तमान में सैकडोंं गोवंशीय पशु सुबह से ही लावारिस छोड़ दिए जाते हैं। दिन भर इन गायों को गंदगी से ही पेट भरना होता है। तपती धूप हो या घनघोर बारिश इन गायों को इनके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
जो गायें सड़कों पर अक्सर नजर आती हैं उनमें से अधिकांश गायें पशुपालकों की हैं। पशुपालक सुबह गायों से दूध निकालकर उन्हें खुला छोड़ देते हैं। शाम को गाय से पुन: दूध निकालकर उन्हें रात को बांध दिया जाता है। सुबह होने पर फिर इन्हें छोड़ देते हैं। पशुपालकों द्वारा सड़कों पर छोड़े गए यही गोवंशीय पशु अक्सर लोगों की नाराजगी का शिकार बनते हैं।  वहीं कचरे से दूषित पदार्थ खाने से भी गोवंशीय पशुओं की असामयिक मौत हो रही है। सड़कों पर विचरण करने वाले यह पशु अक्सर वाहनों से दुर्घटना के शिकार भी हो जाते हैं।

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