


काशीपुर द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल में वार्षिकोत्सव “आनंद उत्सव 2025” का भव्य आयोजन अत्यंत उत्साह, गरिमा और सांस्कृतिक विविधता के साथ सम्पन्न हुआ। इस वर्ष का थीम था —
“वसुधैव कुटुम्बकम्: संस्कृति और एकता का संगम”, जो मानवता, प्रेम और वैश्विक एकता के शाश्वत संदेश का प्रतीक बना। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ से किया गया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रतीक गोयल जी ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए सत्र 2024–25 की शैक्षणिक, सह-शैक्षणिक, खेलकूद एवं सामाजिक उपलब्धियों का विस्तृत विवरण साझा किया। उन्होंने विद्यालय की समर्पित शिक्षकमंडली और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों पर गर्व व्यक्त किया।
तीन घंटे तक चले इस भव्य सांस्कृतिक समारोह में कक्षा 4 से 12 तक के विद्यार्थियों ने संगीत, नृत्य, नाट्य संवाद एवं अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को साकार किया। भारतीय परंपरा और आधुनिक दृष्टिकोण के अद्भुत संगम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और नारद मुनि के संवाद पर आधारित नाट्य प्रस्तुतीकरण, जिसमें “वसुधैव कुटुम्बकम्” के गूढ़ अर्थ को समकालीन संदर्भों में प्रस्तुत किया गया। तकनीकी निर्भरता और मानव मूल्यों के क्षरण पर उठाए गए प्रश्नों ने उपस्थित जनों को गहन चिंतन के लिए प्रेरित किया। संगीतमय प्रस्तुतियों ने वातावरण में ऊर्जा और आनंद का संचार किया। शास्त्रीय, लोक एवं समकालीन संगीत की स्वर लहरियों ने पूरे परिसर को भावनाओं से भर दिया। विद्यालय के संगीत विभाग के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने सामूहिक गायन, एकल गायन और वाद्य प्रस्तुतियों के माध्यम से “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को मधुर सुरों में पिरो दिया।
विद्यालय की विशिष्टता यह रही कि इस वार्षिकोत्सव में 100% विद्यार्थी सहभागिता सुनिश्चित की गई। “आनंद उत्सव” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल की वह परंपरा है जो प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और आत्मविश्वास विकसित करने का अवसर प्रदान करती है। विद्यार्थियों ने स्वामी विवेकानंद जी, रवीन्द्रनाथ टैगोर, मदर टेरेसा, नेल्सन मंडेला, मलाला यूसुफ़ज़ई और अल्बर्ट आइंस्टीन जैसी महान विभूतियों के विचारों को मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत कर सभी को प्रेरित किया। विद्यालय के चेयरमैन श्री नीरज कपूर जी ने अपने उद्बोधन में कहा — “द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल का उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उनमें जीवन जीने की कला और मानवीय मूल्यों की गहराई को विकसित करना है। हर बच्चा हमारे लिए सिर्फ एक विद्यार्थी नहीं, बल्कि ‘Every child is my child’ — यही गुरुकुल की आत्मा है। हमारा लक्ष्य है कि गुरुकुल के विद्यार्थी न केवल शहर, बल्कि विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाएँ।” उन्होंने आगे कहा — “शहर छोटा नहीं होता, इंसान की सोच छोटी हो जाती है। अगर सोच बड़ी हो तो किसी भी छोटे से स्थान से विश्व बदलने की शुरुआत की जा सकती है। गुरुकुल के बच्चे इसी बड़े सपने के वाहक हैं।”
डायरेक्टर श्रीमती वसुधा कपूर जी ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में विद्यालय के विजन और मिशन पर प्रकाश डालते हुए कहा —“गुरुकुल का स्वप्न है ऐसा शिक्षण वातावरण निर्मित करना, जहाँ ज्ञान, संस्कृति और संवेदनशीलता का समन्वय हो। हमारा उद्देश्य है कि प्रत्येक विद्यार्थी आत्मविश्वासी, रचनात्मक और करुणामय बने — क्योंकि यही सच्ची शिक्षा का सार है।” उन्होंने आगे कहा — “‘द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल’ केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक परिवार है — जहाँ शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को आत्मसात करते हैं। हमारा प्रयास है कि यहाँ से निकलने वाला प्रत्येक विद्यार्थी विश्व नागरिक बनकर मानवता की सेवा में अपना योगदान दे।”
सचमुच, “वसुधैव कुटुम्बकम्” की आत्मा के माध्यम से द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल ने “एक विश्व, एक परिवार” का संदेश प्रत्येक हृदय में अंकित कर दिया।
इस अवसर पर विद्यालय की चेयरपर्सन श्रीमती चम्पा कपूर जी, चेयरमैन श्री नीरज कपूर जी, डायरेक्टर श्रीमती वसुधा कपूर जी, मार्केटिंग एवं एडवर्टाइजमेंट हेड सुश्री कामाक्षी कपूर जी, प्रधानाचार्य श्री प्रतीक गोयल जी, सहित संपूर्ण विद्यालय परिवार, शिक्षकगण एवं अभिभावकगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

जुगनू खान
संपादक – जुगनू खबर
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