February 15, 2026
Screenshot_20251124_170336_WhatsApp.jpg

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा घोषित राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार (एनजीआरए) 2025 में उत्तराखंड ने गौरव बढ़ाया है। देश के पशुधन और डेयरी क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जाने वाले इस सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान में जनपद ऊधम सिंह नगर की दूध उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड, कुल्हा ने सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति/दूध उत्पादक/डेयरी किसान उत्पादक संगठन (पूर्वोत्तर/हिमालयी श्रेणी) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

यह समिति महिला नेतृत्व का सशक्त उदाहरण है। कुल्हा डेयरी समिति वर्ष 1991 से संचालित है और इसकी सबसे विशेष बात यह है कि समिति की सभी 300 से अधिक सदस्य महिलाएँ हैं। समिति की अध्यक्ष द्रोपती देवी पिछले 15 वर्षों से लगातार निर्विरोध चुनी जा रही हैं, जो ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल है।

समिति का दूध उत्पादन में हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा है। वर्तमान में समिति प्रतिदिन लगभग 1100 लीटर दूध की आपूर्ति कर रही है। अपनी गुणवत्ता, पारदर्शी कार्यप्रणाली और उत्कृष्ट प्रबंधन के कारण यह डेयरी अपने इतिहास में कभी भी नुकसान में नहीं गई। बल्कि हर वर्ष लाभ अर्जित करते हुए समिति अपने सदस्यों को बोनस वितरित करती आ रही है।
इसी क्रम में इस वर्ष समिति के सभी सदस्यों को कुल ₹2,41,000 का बोनस प्रदान किया गया।

उत्तराखंड सरकार और माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि कुल्हा डेयरी जैसी समितियाँ आज राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त कर रही हैं।

आपको बता दें, समिति को यह प्रथम पुरस्कार पूर्वोत्तर एवं हिमालयी क्षेत्र के 11 राज्यों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर मिला है। इस पुरस्कार में ₹2 लाख की राशि प्रदान की जाती है। समिति द्वारा पशुधन के उपचार की सभी व्यवस्थाएँ स्वयं के चिकित्सकों के माध्यम से की जाती हैं। पशुओं के लिए साइलेंज, पशु आहार आदि की संपूर्ण आपूर्ति दुग्ध विकास विभाग के माध्यम से की जाती है। समिति द्वारा विभाग के सभी निर्देशों का पूर्ण पालन किया जाता है।

कुल्हा दूध उत्पादक सहकारी समिति केवल दूध उत्पादन तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, नेतृत्व क्षमता और सामुदायिक विकास का जीवंत प्रतीक है। धामी सरकार की महिला सशक्तिकरण नीतियों ने ऐसे संगठनों को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं।

बाइट – कविता जोशी (सदस्य, दूध उत्पादक सहकारी समिति, कुल्हा)

बाइट- राजेश मेहता ( महाप्रबंधक, दुग्ध विकास विभाग, उत्तराखंड)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *