




सिख इतिहास के स्वर्णिम अध्याय चार साहिबज़ादों के बलिदान सप्ताह के अवसर पर ओरिसन स्कूल कुंडेश्वरी काशीपुर के विद्यार्थियों ने श्रद्धा और सम्मान के साथ एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर विद्यालय के बच्चे प्रधानाचार्य एवं निदेशक डॉ. आर. एस. तिवारी तथा अपने शिक्षकों के साथ गुरुद्वारा साहिब पहुँचे, जहाँ उन्होंने मत्था टेककर शहीद साहिबज़ादों को नमन किया तथा गुरुद्वारा साहिब में प्रसाद और दूध ग्रहण किया।
इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा एक अनुशासित एवं प्रेरणादायक पैदल रैली निकाली गई। यह रैली आसपास के सभी गुरुद्वारों तक गई, जिसमें बच्चों ने चार साहिबज़ादे अमर रहें एवं धर्म और सत्य की विजय हो जैसे नारों से पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। रैली का उद्देश्य बच्चों को चार साहिबज़ादों के अद्वितीय बलिदान, साहस और धर्मनिष्ठा से परिचित कराना था।
गुरुद्वारों में जाकर बच्चों को चार साहिबज़ादों के जीवन एवं बलिदान की गाथा सुनाई गई, जिससे उनके मन में देश, धर्म और नैतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना और अधिक प्रबल हुई। स्थानीय लोगों ने भी बच्चों के इस प्रयास की सराहना की और इसे नई पीढ़ी के लिए एक अनुकरणीय पहल बताया।
इस अवसर पर विद्यालय की मेंटर श्रीमती उमा वात्सल्य ने कहा कि
चार साहिबज़ादों का बलिदान यह संदेश देता है कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए आयु कभी बाधा नहीं बनती। ऐसे आयोजन बच्चों में संस्कार, साहस और नैतिक मूल्यों का विकास करते हैं।
विद्यालय के प्रबंध निदेशक श्री नितिन वात्सल्य ने कहा कि
आज की युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। चार साहिबज़ादों का जीवन त्याग, अनुशासन और आत्मबल की अद्भुत मिसाल है।
वहीं प्रधानाचार्य एवं निदेशक डॉ. आर. एस. तिवारी, ने कहा कि
चार साहिबज़ादों का बलिदान केवल सिख समाज ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत है। इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनमें देशभक्ति की भावना विकसित करते हैं।
और बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा, ताकि बच्चे अपने इतिहास और संस्कृति से जुड़े रहें। चार साहिबज़ादों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

जुगनू खान
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