काशीपुर। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती अलका पाल ने कहा कि प्रदेश के बहुचर्चित अंकिता भंडारी केस में जनता की भावना केवल सजा तक सीमित नहीं है। जनता यह भी जानना चाहती है कि इस साजिश के पीछे कौन-कौन लोग थे और किसने इस पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया। इसी वजह से सड़कों पर उतरी भीड़ केवल विरोध नहीं कर रही थी, बल्कि न्याय की पुकार लगा रही थी। सीबीआई जांच को लेकर सरकार की घोषणा पर सवाल उठाते हुए अलका पाल ने कहा कि जिस तरह से सीबीआई जांच की घोषणा की गई, उससे यह स्पष्ट नहीं होता कि इस मामले में सरकार पूरी तरह ईमानदार है। उन्होंने कहा कि मामले में शुरू से ही कांग्रेस और अंकिता भंडारी के माता-पिता की मांग है कि जांच सीबीआई से हो, लेकिन वह भी सर्वोच्च न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में। केवल जांच सौंप देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी दबाव में न हो। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में वीआईपी नामों की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हो चुके हैं, लिहाजा सीबीआई जांच का सबसे अहम पहलू यही होना चाहिए कि जिन प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से उजागर किया जाए। यह पूछे जाने पर कि धामी सरकार ने अचानक सीबीआई जांच की संस्तुति क्यों की? अलका पाल ने इसे जनता और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के दबाव का परिणाम बताया। अलका पाल ने कहा कि तमाम विपक्षी दलों और विशेषकर कांग्रेस पार्टी के निरंतर दबाव के चलते सरकार को पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार अपने आप में ईमानदार होती, तो उसे तीन साल पहले ही सीबीआई जांच स्वीकार कर लेनी चाहिए थी, क्योंकि यह मांग पहले दिन से उठाई जा रही थी। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक परिवार या पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की बेटियों के सम्मान से जुड़ी है। ‘उत्तराखंड बंद’ के सवाल पर अलका पाल ने समर्थन देने वालों का आभार जताया। साथ ही कहा कि मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी न होने तक कांग्रेस पार्टी का आंदोलन और दबाव जारी रहेगा।
काशीपुर। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती अलका पाल ने कहा कि प्रदेश के बहुचर्चित अंकिता भंडारी केस में जनता की भावना केवल सजा तक सीमित नहीं है। जनता यह भी जानना चाहती है कि इस साजिश के पीछे कौन-कौन लोग थे और किसने इस पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया। इसी वजह से सड़कों पर उतरी भीड़ केवल विरोध नहीं कर रही थी, बल्कि न्याय की पुकार लगा रही थी। सीबीआई जांच को लेकर सरकार की घोषणा पर सवाल उठाते हुए अलका पाल ने कहा कि जिस तरह से सीबीआई जांच की घोषणा की गई, उससे यह स्पष्ट नहीं होता कि इस मामले में सरकार पूरी तरह ईमानदार है। उन्होंने कहा कि मामले में शुरू से ही कांग्रेस और अंकिता भंडारी के माता-पिता की मांग है कि जांच सीबीआई से हो, लेकिन वह भी सर्वोच्च न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में। केवल जांच सौंप देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी दबाव में न हो। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में वीआईपी नामों की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हो चुके हैं, लिहाजा सीबीआई जांच का सबसे अहम पहलू यही होना चाहिए कि जिन प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से उजागर किया जाए। यह पूछे जाने पर कि धामी सरकार ने अचानक सीबीआई जांच की संस्तुति क्यों की? अलका पाल ने इसे जनता और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के दबाव का परिणाम बताया। अलका पाल ने कहा कि तमाम विपक्षी दलों और विशेषकर कांग्रेस पार्टी के निरंतर दबाव के चलते सरकार को पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार अपने आप में ईमानदार होती, तो उसे तीन साल पहले ही सीबीआई जांच स्वीकार कर लेनी चाहिए थी, क्योंकि यह मांग पहले दिन से उठाई जा रही थी। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक परिवार या पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की बेटियों के सम्मान से जुड़ी है। ‘उत्तराखंड बंद’ के सवाल पर अलका पाल ने समर्थन देने वालों का आभार जताया। साथ ही कहा कि मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी न होने तक कांग्रेस पार्टी का आंदोलन और दबाव जारी रहेगा।

जुगनू खान
संपादक – जुगनू खबर
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