April 1, 2026
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काशीपुर स्थित विद्यालय परिसर इस अवसर पर प्रेम, सम्मान और पारिवारिक मूल्यों की सुंदर अनुभूति से भर उठा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में अपने माता-पिता के प्रति आदर, कृतज्ञता और संस्कारों की भावना विकसित करना था, ताकि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय परंपराओं से भी जुड़े रहें।
इस विशेष आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती नूपुर गुप्ता जी डायरेक्टर आशीष बिल्डर्स एंड डेवलपर्स(ABD) रहीं।उनके आगमन पर विद्यालय परिवार ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि माता-पिता का सम्मान करना भारतीय संस्कृति की सबसे सुंदर परंपराओं में से एक है और ऐसे आयोजन बच्चों को जीवनभर याद रहने वाले संस्कार प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत आकर्षक रूप से सजे मंच से हुई, जिसे पारंपरिक सजावट से विशेष रूप दिया गया था। जैसे ही कार्यक्रम प्रारंभ हुआ, बच्चों ने अपने मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीत लिया। यह प्रस्तुति केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं थी, बल्कि अपने माता-पिता के प्रति प्रेम और धन्यवाद की भावपूर्ण अभिव्यक्ति भी थी। मधुर संगीत पर बच्चों की सजीव भाव-भंगिमाओं ने वहां उपस्थित अभिभावकों को भावुक कर दिया। कई माता-पिता की आंखों में गर्व और खुशी स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
इसके पश्चात विद्यार्थियों ने पारंपरिक विधि से अपने माता-पिता का पूजन किया। बच्चों ने तिलक लगाकर, पुष्प अर्पित कर तथा चरण स्पर्श कर अपने जीवन में माता-पिता के सर्वोच्च स्थान को स्वीकार किया। यह दृश्य अत्यंत भावुक था और पूरे सभागार में तालियों की गूंज सुनाई दी। इस अनोखे क्षण ने परिवार और संस्कारों के महत्व को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि श्रीमती नूपुर गुप्ता जी ने अपने भाषण में बताया कि माता-पिता हमारे पहले गुरु होते हैं। वे हमें जीवन के हर कदम पर मार्गदर्शन देते हैं और कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता का प्रेम निस्वार्थ होता है और उनका सम्मान करना हर संतान का कर्तव्य है। इन विचारों ने उपस्थित सभी लोगों के दिलों को छू लिया।
उन्होंने विद्यालय के प्रयासों को सराहनीय बताते हुए कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार देना ही किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।
विद्यालय की प्रबंधिका श्रीमती शिल्पी गर्ग ने भी अपने संबोधन में कहा कि मातृ-पितृ पूजन दिवस केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आज के समय में जहां तकनीक और व्यस्त दिनचर्या ने पारिवारिक संवाद को सीमित कर दिया है, ऐसे आयोजन बच्चों को परिवार के महत्व का एहसास कराते हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता का आशीर्वाद ही बच्चों की सबसे बड़ी पूंजी है।
अभिभावकों ने विद्यालय के इस प्रयास की खुलकर प्रशंसा की। उनका कहना था कि इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं और उनमें अच्छे संस्कार विकसित करते हैं। कई अभिभावकों ने साझा किया कि इस आयोजन ने उन्हें गर्व का अनुभव कराया और बच्चों के साथ उनका भावनात्मक संबंध और मजबूत हुआ।
इस आयोजन में परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम देखने को मिला। जहां एक ओर भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर बच्चों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और प्रतिभा भी उजागर हुई। मंच पर बच्चों का उत्साह और अभिभावकों का समर्थन इस बात का प्रमाण था कि विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाने का मूल उद्देश्य बच्चों को यह सिखाना है कि जीवन में चाहे वे कितनी भी सफलता प्राप्त करें, माता-पिता का स्थान सदैव सर्वोपरि रहेगा। उनका सम्मान करना और उनके प्रति कृतज्ञ रहना हर संतान की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. गौरव गर्ग जी ने धन्यवाद प्रस्तुत किया , जिसमें मुख्य अतिथि, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का इस आयोजन को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया गया। सभी के सहयोग और सहभागिता से यह कार्यक्रम अत्यंत प्रभावशाली और यादगार बन सका।
प्रधानाचार्य डॉ. गौरव गर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि 14 फरवरी का दिन केवल एक उत्सव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह भारतीयों के लिए गहरी संवेदना और श्रद्धांजलि का दिन भी है। उन्होंने बताया कि इसी दिन पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के काफिले पर हुए हमले में कई वीर जवानों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था।
उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपने देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों के साहस, समर्पण और त्याग को हमेशा याद रखना चाहिए। ऐसे अवसर हमें यह सिखाते हैं कि राष्ट्र की एकता और सुरक्षा के लिए हमारे जवान किस प्रकार कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं। डॉ. गर्ग ने छात्रों को प्रेरित किया कि वे देशभक्ति की भावना को अपने जीवन में अपनाएं, शहीदों के बलिदान का सम्मान करें और एक जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें।
समापन के समय विद्यालय परिसर में सकारात्मक ऊर्जा और खुशी का वातावरण महसूस किया जा सकता था। बच्चे अपने माता-पिता के साथ मुस्कुराते हुए तस्वीरें खिंचवा रहे थे और अभिभावक विद्यालय की इस पहल की सराहना करते नजर आए। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि परिवार, प्रेम, सम्मान और संस्कारों को मजबूत करने का एक प्रेरणादायक प्रयास भी था।
मातृ-पितृ पूजन दिवस का यह भव्य आयोजन सभी के लिए अविस्मरणीय बन गया। इसने यह संदेश दिया कि बदलते समय में भी पारिवारिक मूल्यों का महत्व कम नहीं हुआ है। जब बच्चे अपने माता-पिता के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करना सीखते हैं, तभी एक सशक्त, संस्कारित और संवेदनशील समाज की नींव रखी जाती है। यह सफल आयोजन इस बात का प्रमाण है कि विद्यालय केवल शिक्षा देने का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों का भी सशक्त माध्यम है।

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