
काशीपुर। महापौर दीपक बाली ने नगर निगम कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में शहर की कई अहम समस्याओं और विकास योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से रामनगर रोड (एनएच-309) की जर्जर हालत, चैती मेला परिसर के विकास, हाईटेक शौचालयों, ड्रेनेज प्लान, सहित अनेक बिंदुओं पर उन्होंने विस्तार से जानकारी दी।
महापौर ने कहा कि रामनगर रोड की दुर्दशा को लेकर जनता और मीडिया लगातार सवाल उठा रहे हैं। यह सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के अंतर्गत आती है, इसलिए इस पर सीधे नगर निगम काम नहीं कर सकता। इसके बावजूद उन्होंने इसे अपनी जिम्मेदारी मानते हुए कई बार शासन प्रशासन से पत्राचार कियाऔर अधिकारियों से वार्ता की। उन्होंने बताया कि पहले भी सड़क के गड्ढों की मरम्मत कराई गई थी। अब इस सड़क के लिए किलोमीटर 1 से 28 तक का एस्टीमेट तैयार कर पहले 16 करोड़ 30 लाख 15 हजार रुपये का प्रस्ताव बनाया गया था, जिसे बाद में संशोधित कर 17 करोड़ 51 लाख रुपये कर दिया गया है और यह प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जा चुका है। जनता की समस्या को देखते हुए वर्तमान में भी गडढों का भरान कराया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामीजी के संज्ञान में यह विषय लाया गया है और विकास की दूरदर्शी सोच रखने वाले आदरणीय मुख्यमंत्री जी ने आश्वस्त किया है कि सड़क की धनराशि जल्द स्वीकृत कराई जाएगी। महापौर ने उम्मीद जताई कि अप्रैल माह के भीतर धनराशि स्वीकृत हो सकती है और वर्षा ऋतु से पहले टेंडर प्रक्रिया शुरू कर सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कार्य इसलिए भी जरूरी हो गया है क्योंकि सड़क का फोरलेन प्रस्ताव पहले ही स्वीकृत हो चुका है, लेकिन फोरलेन निर्माण में समय लगेगा और तब तक मौजूदा सड़क को चलने लायक बनाना आवश्यक है।
प्रेस वार्ता में महापौर ने बताया कि अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा काशीपुर के पास एक हाईटेक किचन तैयार किया जा रहा है, जिसकी लागत लगभग 18 से 20 करोड़ रुपये है। यह किचन लगभग तैयार हो चुका है और इसमें काशीपुर तथा आसपास के सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण गर्म भोजन तैयार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जमीन संबंधी एनओसी की विसंगति के कारण इसकी शुरुआत में बाधा आई थी, जिसे लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री जी को पत्र दिया जिस पर उन्होंने मौके पर ही इस दिक्कत को दूर कराने के निर्देश दिए हैं। महापौर ने उम्मीद जताई कि यह योजना जल्द धरातल पर आ जाएगी।
शहर में जनसुविधाओं को मजबूत करने के लिए महापौर ने बताया कि नगर निगम की ओर से तीन हाईटेक शौचालय स्वीकृत कराए गए हैं। इनमें से एक खड़कपुर-देवीपुरा क्षेत्र में लगभग 79.82 लाख रुपये की लागत से बनाया जाएगा। दूसरा चैती मेला प्रांगण में लगभग 76.87 लाख रुपये की लागत से बनेगा, जबकि तीसरे शौचालय का प्रस्ताव टांडा तिराहे से बदलकर द्रोणा सागर क्षेत्र के लिए किया गया है, जिसकी लागत लगभग 63 लाख रुपये है। उन्होंने कहा कि तीनों शौचालय स्वीकृत हो चुके हैं, केवल एक स्थान परिवर्तन संबंधी औपचारिकता हेतु शेष है, जिसके बाद धनराशि भी जारी हो जाएगी।
प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने शहर के कई मौजूदा शौचालयों की खराब हालत, पानी की कमी, सफाई की कमी, सैनिटरी नैपकिन मशीनों के बंद होने और कुछ स्थानों पर अव्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। इस पर महापौर ने कहा कि सुलभ शौचालय संचालकों के साथ बैठक की जा चुकी है और सभी सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति की समीक्षा कर उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जहां शिकायतें मिली हैं, वहां तत्काल निरीक्षण कराया जाएगा।
गर्मी के मौसम को देखते हुए पेयजल व्यवस्था पर बोलते हुए महापौर ने कहा कि नगर निगम ने पूरे शहर में लगभग 100 नल लगाने का टेंडर जारी कर दिया है। उन्होंने कहा कि जहां जरूरत होगी वहां प्याऊ या वाटर कूलर भी लगाए जाएंगे। वहीं, शहर के भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्रों में अस्थायी या ट्रॉली शौचालय की मांग पर उन्होंने कहा कि यदि उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया जाता है तो उस पर भी विचार किया जा सकता है।
महापौर दीपक बाली ने बताया कि चैती मेला परिसर के विकास को लेकर भी अब ठोस काम शुरू होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्रीजी द्वारा एकत्र हुए 13 करोड़ रुपये चैती मेला परिसर पर ही खर्च करने की घोषणा की गई है और इस राशि का उपयोग चैती मेला परिसर के सौंदर्यीकरण, हरियाली, वॉकिंग एरिया, पेयजल, सुविधाओं और संरचनात्मक विकास पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के भीतर अधिकारियों और आर्किटेक्ट्स के साथ बैठक कर इसकी योजना पर काम शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह योजना मानसखंड योजना से अलग होगी, उल्लेखनीय है कि मां बाल सुंदरी मंदिर और मोटेश्वर महादेव मंदिर को पहले ही मानसखंड में शामिल किया जा चुका है।
चैती मेले की पौराणिकता और गिरती गुणवत्ता को लेकर पत्रकारों ने जब सवाल उठाए तो महापौर ने माना कि राजस्व बढ़ाना ही मेले का उद्देश्य नहीं हो सकता। उन्होंने स्वीकार किया कि मेले की जीवंतता, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक स्वरूप को बचाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अगले वर्ष से पहले एक समग्र योजना बनाकर मेले को फिर से उसके पुराने आकर्षण के साथ जीवित किया जाए। इस संबंध में उन्होंने संकेत दिया कि यदि जनमत और नियमों के अनुसार उचित हुआ, तो नगर निगम भविष्य में चैती मेले के संचालन की जिम्मेदारी लेने पर भी विचार कर सकता है।
शहर की ड्रेनेज समस्या पर महापौर ने कहा कि दीर्घकालिक समाधान के लिए लगभग 650 करोड़ रुपये का बड़ा ड्रेनेज प्लान तैयार किया गया है, जिसमें से करीब 125 करोड़ रुपये की पहली किस्त जल्द जारी होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि नगर निगम स्तर पर भी वर्षा ऋतु से पहले नालों की सफाई और जलभराव रोकने की तैयारी युद्धस्तर पर की जा रही है। उनका कहना था कि पिछली बार अपेक्षाकृत कम जलभराव हुआ था और इस बार भी पूरी तैयारी रखी जाएगी।
स्ट्रीट लाइट के सवाल पर महापौर ने बताया कि ईईएसएल (भारत सरकार की पीएसयू) के साथ प्रस्ताव चल रहा है। शासन स्तर से मंजूरी मिलते ही काशीपुर नगर निगम और ईईएसएल के बीच समझौता होगा और शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा।
इसके अलावा उन्होंने बताया कि गिरिताल, जीजीआईसी, डॉग शेल्टर होम, वेंडिंग जोन, गौशाला समेत कई परियोजनाओं की डीपीआर और ड्राइंग शासन को भेजी जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 17 नए वार्डों के लिए भी सड़क और नाली योजनाएं तैयार की गई हैं, जिनमें से अधिकांश की तकनीकी स्वीकृति (टीएससी) आ चुकी है। महापौर ने कहा कि आने वाले एक से दो महीनों में काशीपुर में कई विकास परियोजनाएं धरातल पर उतरती नजर आएंगी।
प्रेस वार्ता के अंत में महापौर दीपक बाली ने भरोसा दिलाया कि काशीपुर की हर सड़क, हर जनसमस्या और हर विकास कार्य को वह अपनी जिम्मेदारी मानते हैं और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास जारी रहेगा।

जुगनू खान
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