
डा. नरेश बंसल ने सदन के माध्यम से पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह से प्रश्न किया किः-
क्या पंचायती राज मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि-
क- क्या मंत्रालय ने पंचायतों की स्वयं के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) के सृजन की क्षमता का कोई आकलन किया है।
ख- यदि हां तो ऐसे आकलन के क्या परिणाम रहे
ग- क्या डिजिटल संपत्ति कर संगह उपकरणों का प्रायोगिक तौर पर परीक्षण किया गया है।
घ- यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है
ड- क्या राजस्व संगहण को प्रोत्साहित करने के लिए राजकोषीय प्रोत्साहनों पर विचार किया जा रहा है, और
च- यदि हां तो ऐसे प्रोत्साहनों का ब्यौरा क्या है?
इस महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर मे पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि:-
क और ख- पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों के ओएसआर की स्थिति की समीक्षा करने के लिए वर्ष 2022 में ग्रामीण स्थानीय निकायों के स्वयं के राजस्व स्रोत (ओएसआर) पर विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017-18 से वर्ष 2021-22 के दौरान 30 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) द्वारा लगभग 25,595 करोड़ रूपये का ओएसआर एकत्र किया गया है और इस अवधि के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति ओएसआर लगभग 59 रूपये प्रतिवर्ष था। राज्यों में प्रति व्यक्ति ओएसआर में काफी भिन्नता विद्यमान है, जो गोवा में 1635 रूपये प्रति वर्ष तक है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पंचायतों को ओएसआर तैयार करने में जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, उनमें राज्य स्तरीय नियमों और दिशानिर्देशों का अभाव होना या उनका पुराना पड़ गया होना है। पंचायतों को कराधान शक्तियों का अपर्याप्त हस्तांतरण होना, कर और शुल्क लगाने के लिए पंचायतों की अनिच्छा होना, नागरिकों का सीमित सहयोग होना और डिफॉल्टर के लिए कमजोर प्रवर्तन तंत्र आदि शामिल हैं। इस विषय पर किए गए अन्य अध्ययनों के परिणाम भी इसी प्रकार हैं। पंचायती राज मंत्रालय ने इन रिपोर्टों को कार्यान्वयन हेतु राज्यों के साथ साझा किया है।
इसके अलावा 16वें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट के पैरा संख्या 10.50 में यह टिप्पणी की है कि, अधिकंाश स्थानीय निकायों द्वारा सृजित स्वयं के संसाधन नगण्य हैं। वे अपने कार्यों को पूरा करने के लिए यदि पूरी तरह नहीं तो, काफी हद तक केंद्र और राज्य सरकारों पर निर्भर हैं। पैरा संख्या 10.51 में, आयोग ने आगे टिप्पणी की है कि, आनुक्रमिक वित्त आयोगों ने यह कहा है कि आनुक्रमिक वित्त आयोगों ने यह कहा है कि स्थानीय निकायों के लिए वित्तीय संसाधनों के प्रावधान की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।
ग और घ- पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों के ओएसआर संग्रह को डिजिटाइज करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके तहत समर्थ पंचायत पोर्टल विकसित किया गया है, जो एक समर्पित डिजिटल प्लेटफार्म है। यह पोर्टल कर और गैर-कर मांगों को तैयार करने, कर रजिस्टरों के रख-रखाव भुगतान गेटवे के माध्यम से बकाया राशि का ऑनलाइन भुगतान और राजस्व की ऑनलाइन ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है। इस डिजिटल सशक्तिकरण का उद्देश्य स्थानीय वित्तीय प्रशासन में पारदर्शिता, कार्यदक्षता और विस्तारशीलता लाना है। इस पोर्टल का हिमाचल प्रदेश और छतीसगढ़ राज्यों में सफल पायलट परीक्षण किया जा चुका है। सभी राज्यों में समर्थ पंचायत पोर्टल पर जुडने का अनुरोध किया गया है।
ड और च- संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) योजना के तहत पंचायतों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत, पंचायती राज मंत्रालय ने वर्ष 2025 में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (एनपीआरडी) पर आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार (एएनपीएसए) की शुरूआत की है। यह पहली बार है कि मंत्रालय ने ग्राम पंचायतों द्वारा स्वयं के के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) में वृद्धि के माध्यम से आत्मनिर्भरता (स्वयं-निर्भरता) के अनुकरणीय प्रयासों को प्रोत्साहित करने और मान्यता देने के लिए समर्पित विशेष श्रेणी पुरूस्कारों को संस्थागत रूप दिया है। आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार (एएनपीएसए) का उद्देश्य पंचायतों द्वारा स्वयं के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) में वृद्धि के माध्यम से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना हे। प्रत्येक पुरस्कार में क्रमशः 1 करोड़ रूपये (रैंक 1), 75 लाख रूपये (रैंक 2) और 50 लाख रूपये (रैंक 3) का वित्तीय प्रोत्साहन शामिल है।
इसके अलावा, सोहलवें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकाय (आरएलबी) निष्पादन अनुदान के रूप में 43524 करोड़ रूपये के आवंटन की सिफारिश की है, जिसे आरएलबी द्वारा ओएसआर के सृजन और वृद्धि से जोड़ा गया है।
द्वारा
निजी सचिव
डा. नरेश बंसल जी
भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष एवं सांसद राज्यसभा

जुगनू खान
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