
काशीपुर। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पूरे प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी जिस तेजी के साथ आगे बढ़ रही है उस तेजी के साथ देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस कहीं से कहीं तक भी आगे बढ़ती नहीं बताई जा रही है। कांग्रेस की आंतरिक कलह अब समूचे उत्तराखंड में खुलकर सामने आ रही है और जनता इस कलह के परिणाम भांपकर भाजपा के प्रति मंत्रमुग्ध है। बात काशीपुर विधानसभा क्षेत्र की करें तो यहां लगभग चार दशक से विधानसभा चुनाव में चला आ रहा सत्ता का सूखा इस बार भी खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। दायित्व संभालने के बाद कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अलका पाल लगातार कांग्रेस को मजबूत करने में जुटी हैं, लेकिन जानकारी मिल रही है कि कुछ लोग एक समानांतर संगठन चलाकर काशीपुर में कांग्रेस को लगातार कमजोर करने की ठाने हुए हैं। ऐसे लोग यह दर्शाने में लगे हैं कि हम ही सच्चे कांग्रेसी हैं, जबकि ये लोग आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा डालने में जरा भी हिचकिचाहट महसूस नहीं कर रहे हैं। अनुशासन नाम की चीज तो जैसे काशीपुर कांग्रेस में बीते जमाने की बात हो गई। कोई भी अपने यहां किसी को भी बुलाकर स्वागत-सत्कार करे और सारे इकठ्ठा न हों, तो यही कहा जाएगा कि कुनबा बिखरा हुआ है। रविवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम में बड़े बिखराव की जानकारी सामने आई है, जिसमें अभी हाल कांग्रेस में शामिल हुए एक नेताजी की आवभगत के दौरान वरिष्ठ कांग्रेसी अनुपम शर्मा, कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अलका पाल, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी एनसी बाबा, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मनोज जोशी, पूर्व कांग्रेस महानगर अध्यक्ष मुशर्रफ हुसैन, जितेंद्र सरस्वती, जय सिंह गौतम आदि कई कांग्रेसियों को बुलाया नहीं गया ऐसे में अहम विचारणीय विषय ये है कि ये बिखराव कौन कर या करवा रहा है। कहना ग़लत नहीं होगा कि काशीपुर में महानगर कांग्रेस के समानांतर संगठन चलाने वालों पर कांग्रेस हाईकमान ने वक्त रहते लगाम न कसी तो आगामी विधानसभा में कांग्रेस काशीपुर में एक बार फिर हार का सामना करने को तैयार रहे।

जुगनू खान
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