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काशीपुर। मातृ दिवस के अवसर पर भाजपा काशीपुर महिला मोर्चा कविनगर मंडल महामंत्री किरन फर्त्याल ने समस्त मातृशक्ति को नमन करते हुए कहा कि मां केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी शक्ति, प्रेरणा और प्रेम का अथाह स्रोत होती है। मां का स्नेह, त्याग, तपस्या और आशीर्वाद ही संतान के जीवन को सफल, संस्कारित और उज्ज्वल बनाता है। मां के बिना जीवन की कल्पना अधूरी है, क्योंकि मां ही वह आधार है, जिसके प्रेम और संस्कारों से व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है और उसे जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। किरन फर्त्याल ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि “प्रिय मां, आपने मुझे जीवन में जो कुछ भी सिखाया, जितना स्नेह, प्रेम, देखभाल और संस्कार दिए हैं, उसके लिए मैं सदैव आपकी आभारी रहूंगी। मेरी दुनिया की सबसे प्यारी महिला को मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। मां, आपकी दुआओं में ही मेरी सबसे बड़ी सफलता छिपी है और आपके आशीर्वाद के बिना मेरा जीवन अधूरा है।” उन्होंने कहा कि इस मातृ दिवस पर उन सभी माताओं को हृदय से नमन करना चाहिए, जिनके स्नेह, तपस्या, संघर्ष और आशीर्वाद से हमारा जीवन सफल और संस्कारित बनता है। मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन की वह निर्मल धारा है, जो हमें प्रेम, धैर्य, करुणा, सहनशीलता और संघर्ष करना सिखाती है। मां का प्रेम अनंत होता है। इस भाव को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि “ऊपर जिसका अंत नहीं उसे आसमान कहते हैं और जहां मां का प्यार कम नहीं होता, उसे मां कहते हैं।” यह पंक्ति मां के असीम और निस्वार्थ प्रेम को सच्चे अर्थों में दर्शाती है। किरन फर्त्याल ने कहा कि मां धैर्य, ममता और त्याग की मूर्ति होती है, जो बिना किसी स्वार्थ के अपने बच्चों से प्रेम करती है। वह अपने बच्चों के सपनों को साकार करने के लिए अपनी इच्छाओं और खुशियों का त्याग कर देती है। जब जीवन में कठिनाइयां आती हैं तो मां एक मजबूत ढाल बनकर अपने बच्चों के साथ खड़ी रहती है और हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाती है। मां ही बच्चे की पहली शिक्षिका होती है, जो उसे जीवन में सही मार्ग पर चलने का पाठ पढ़ाती है और अच्छे संस्कारों से उसका भविष्य संवारती है। उन्होंने कहा कि मां के चरणों में ही स्वर्ग बसता है और मां का आशीर्वाद संतान के लिए सबसे बड़ा धन होता है। हमें केवल मातृ दिवस पर ही नहीं, बल्कि जीवन के हर दिन अपनी मां का सम्मान करना चाहिए, उनकी सेवा करनी चाहिए और उनके त्याग व प्रेम के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए। मां का ऋण कोई संतान कभी नहीं चुका सकती, लेकिन उनके प्रति सम्मान, सेवा और प्रेम का भाव रखकर हम उनके आशीर्वाद के पात्र अवश्य बन सकते हैं। मातृ दिवस हम सभी के लिए अपनी मां के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने का सबसे सुंदर अवसर है।

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