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काशीपुर। द गुरुकुल फाउंडेशन में आयोजित इंडियन नॉलेज सिस्टम आधारित चर्चा कार्यक्रम “समन्वय” में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचीं शिक्षाविद् एवं समाजसेवी डॉ दीपिका गुड़िया आत्रेय ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर अपने विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में आईआईटी मद्रास से आए विद्वान डॉ दीपक परमाशिवन के अत्यंत प्रेरणादायक एवं महत्वपूर्ण विचारों को सुनने का अवसर मिला, जिन्होंने भारतीय पुरातन संस्कृति एवं शिक्षा पद्धति को आधुनिकता और नवीन सोच के साथ जोड़कर शिक्षा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। डॉ दीपिका गुड़िया आत्रेय ने कहा कि आज के समय में ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है, जो भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा को जीवित रखते हुए विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान और तकनीक से भी जोड़ सके।

उन्होंने कहा कि डॉ दीपक परमाशिवन पुरातन एवं नवीन ज्ञान के समन्वय की सजीव प्रतिमूर्ति हैं और उनके विचार शिक्षा जगत के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक हैं। कार्यक्रम में आईआईएम के प्रोफेसर डॉ वैभव भमौरिया ने भी ज्ञान प्रक्रिया और भारतीय शिक्षा प्रणाली के विभिन्न आयामों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। डॉ आत्रेय ने कहा कि द गुरुकुल फाउंडेशन भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षा के समन्वय की दिशा में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है, जो समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

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