Screenshot_20260625_085112_WhatsApp

काशीपुर। मोहल्ला बांसफोड़ान स्थित हलवाई चौक पर अंजुमन गुलिस्ताने रज़ा कमेटी के तत्वावधान में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन की याद में एक अजीमो-शान मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर अहले बैत की कुर्बानियों को याद किया तथा उनके बताए हुए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की निजामत कारी महमूद रज़ा ने की, जबकि इसकी सरपरस्ती शहर इमाम मुफ्ती फैजान साहब ने की। मजलिस में विशेष रूप से भगतपुर से पधारे मुफ्ती मुकर्रम साहब तथा दड़ियाल (स्वार) से आए मुफ्ती फैजुल रहमान साहब ने अपने प्रभावशाली और ज्ञानवर्धक खिताब से उपस्थित लोगों को संबोधित किया। अपने संबोधन में दोनों उलेमाओं ने कर्बला की घटना का विस्तार से उल्लेख करते हुए बताया कि हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ अत्याचार और जुल्म के खिलाफ डटकर मुकाबला किया। उन्होंने कहा कि कर्बला के मैदान में तमाम कठिनाइयों, भूख और प्यास की शिद्दत के बावजूद इमाम हुसैन और उनके साथियों ने सब्र, हिम्मत और ईमान का दामन नहीं छोड़ा तथा नियमित रूप से नमाज अदा करते रहे। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने जुल्म के सामने झुकने के बजाय शहादत को स्वीकार किया और पूरी इंसानियत को यह संदेश दिया कि सत्य और न्याय के लिए हर कुर्बानी दी जा सकती है, लेकिन अत्याचार के सामने सिर नहीं झुकाया जा सकता। मजलिस में कारी गुलाम यासीन साहब ने भी तकरीर पेश की और अपनी मधुर आवाज में नात व मनकबत पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया। “या रसूलल्लाह, या हबीब अल्लाह”, “आंखों की ठंडक, दिल का सुकून, या हसन या हुसैन” तथा “हम हुसैनी हैं, हम हुसैनी हैं” जैसी नातों और मनकबतों ने उपस्थित अकीदतमंदों को भाव-विभोर कर दिया। शहर इमाम मुफ्ती फैजान साहब ने अपने खिताब में कहा कि हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन की जिंदगी हम सभी के लिए एक आदर्श है। उन्होंने कहा कि यदि समाज उनके बताए हुए रास्ते पर चले, सच्चाई, सब्र, इंसाफ और इंसानियत को अपनाए, तो जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान स्वतः हो सकता है। उन्होंने लोगों से आपसी भाईचारे, प्रेम और सौहार्द को बढ़ावा देने का आह्वान किया। मजलिस के दौरान कर्बला की कुर्बानियों का जिक्र सुनकर महफिल में मौजूद अनेक लोगों की आंखें नम हो गईं। कार्यक्रम के अंत में सलाम पढ़ा गया और मुल्क में अमन, चैन, खुशहाली तथा इंसानियत की भलाई के लिए विशेष दुआ की गई। इस अवसर पर मंच पर हाफिज सलीम, हाफिज मुबीन, हाफिज यामीन, विभिन्न मस्जिदों के इमाम हजरात तथा जफर मुन्ना मौजूद रहे। वहीं कमेटी की ओर से आरिफ, असगर अली, मोहम्मद अजीम, नौमान अनस, मोहम्मद आफताब, आलम, सलीम, अमन, आकिब, शमशेर अली, मोहम्मद इकराम, अल्तमश, शाहिद माहीगीर, अख्तर माहीगीर, युसूफ पेंटर, रियासत टिल्लू, मोहम्मद फहीम सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी और अकीदतमंद उपस्थित रहे। मजलिस का समापन सामूहिक दुआ के साथ हुआ, जिसमें देश और समाज में शांति, सौहार्द तथा आपसी भाईचारे की कामना की गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!