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काशीपुर। भारतीय शिशु रोग अकादमी (आईएपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीलम मोहन के नेतृत्व में देशभर में संचालित राष्ट्रीय ‘संजीवनी : हृदय पुनर्जीवन जन-जागरूकता अभियान’ के तहत 21 जुलाई 2026 को पूरे देश में एक साथ हृदय पुनर्जीवन (सीपीआर) जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य प्रत्येक परिवार, विद्यालय, कार्यालय और समुदाय को हृदय पुनर्जीवन के प्रति जागरूक एवं प्रशिक्षित बनाना है, ताकि अचानक हृदय गति रुकने जैसी आपात स्थिति में आम नागरिक भी तत्काल सहायता देकर किसी व्यक्ति का जीवन बचा सकें। इसी क्रम में आईएपी उत्तराखंड ने पूरे प्रदेश में सात स्थानों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें 485 लोगों को हृदय पुनर्जीवन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इन प्रतिभागियों में बड़ी संख्या में आम नागरिक, विद्यार्थी, अभिभावक एवं विभिन्न संस्थानों से जुड़े लोग शामिल रहे। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने प्रतिभागियों को आपातकालीन परिस्थितियों में सही तकनीक से हृदय पुनर्जीवन देने का अभ्यास भी कराया। इस अभियान के सफल संचालन में राष्ट्रीय संयोजक डॉ. लोकेश तिवारी, राष्ट्रीय सचिव डॉ. रुचिरा गुप्ता, आईएपी उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता, राज्य समन्वयक डॉ. मान सिंह तथा आईएपी उत्तराखंड के सचिव डॉ. राकेश कुमार का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन रहा।

डॉ. रवि सहोता ने दिया जन-जागरूकता का संदेश

आईएपी उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता ने कहा कि अचानक हृदय गति रुकने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि आसपास मौजूद व्यक्ति हृदय पुनर्जीवन की सही विधि जानता हो और समय रहते उसका प्रयोग कर दे, तो अनेक लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल चिकित्सकों का ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का हृदय पुनर्जीवन का प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक है। डॉ. सहोता ने कहा कि आईएपी उत्तराखंड का उद्देश्य प्रदेश के अधिक से अधिक लोगों तक यह प्रशिक्षण पहुंचाना है, ताकि हर घर, हर विद्यालय और हर कार्यस्थल पर ऐसे लोग तैयार हों जो आपात स्थिति में किसी की जान बचाने में सक्षम हों। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस अभियान से जुड़ें और अपने परिवार व समाज को भी इसके प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि हृदय पुनर्जीवन का ज्ञान किसी भी व्यक्ति के लिए जीवनभर उपयोगी साबित हो सकता है और समय पर दिया गया सही उपचार किसी परिवार की खुशियां बचा सकता है।
इस अभियान को सफल बनाने में डॉ. विशाल कौशिक, डॉ. हंस वैष सहित अनेक प्रशिक्षकों एवं भारतीय शिशु रोग अकादमी के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। अभियान के अंत में सभी नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में हृदय पुनर्जीवन प्रशिक्षण प्राप्त करने और समाज को जागरूक बनाने का आह्वान किया गया।

संदेश:
“हृदय पुनर्जीवन सीखें, जीवन बचाएँ — हृदय पुनर्जीवन के लिए तैयार भारत बनाएँ।”

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