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धूल फांक रहीं लाखों की जांच मशीनें

काशीपुर। एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय में संचालित हृदय चिकित्सा केंद्र पिछले करीब 11 वर्षों से हृदय रोग विशेषज्ञ की बाट जोह रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती न होने के कारण नियमित सेवाएं बंद पड़ी हैं। वहीं, मरीजों की जांच के लिए उपलब्ध ईसीजी, टीएमटी और ईको मशीनें भी लंबे समय से उपयोग में नहीं आ पा रही हैं। सरकारी स्तर पर हृदय रोग का उपचार और जांच सुविधा नहीं मिलने से मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां उन्हें जांच और उपचार पर अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है। रामनगर रोड स्थित एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय परिसर में हृदय चिकित्सा केंद्र का निर्माण वर्ष 1986 में सहकारी गन्ना समिति की ओर से कराया गया था। तत्कालीन विदेश मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने केंद्र का शुभारंभ किया था। इसके बाद वर्ष 1997 में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. बीसी जोशी ने एल डी भट्ट चिकित्सालय में कार्यभार संभाला और करीब 18 वर्षों तक मरीजों को सेवाएं दीं। उन्होंने 25 जून 2015 तक यहां अपनी सेवाएं दीं। डॉ. जोशी के कार्यकाल में हृदय चिकित्सा केंद्र पर बड़ी संख्या में मरीज उपचार और परामर्श के लिए पहुंचते थे। बताया जाता है कि उस समय प्रतिदिन करीब 200 मरीजों की ओपीडी होती थी। मरीजों को भर्ती करने की सुविधा के साथ ही हृदय संबंधी विभिन्न जांचें भी की जाती थीं। ईसीजी, टीएमटी और ईको जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधाएं उपलब्ध होने से स्थानीय लोगों को हृदय संबंधी बीमारी के उपचार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता था।/डॉ. बीसी जोशी के जाने के बाद से स्वास्थ्य विभाग अब तक यहां स्थायी रूप से हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं कर पाया है। विशेषज्ञ के अभाव में हृदय विभाग केंद्र की गतिविधियां धीरे-धीरे ठप होती चली गईं। दूसरी ओर, मरीजों की जांच के लिए उपलब्ध महंगी मशीनें भी लंबे समय से इस्तेमाल के अभाव में बंद कमरों में पड़ी हैं। मशीनों के लगातार बंद रहने से उनके रखरखाव और तकनीकी स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

निजी अस्पतालों का लेना पड़ रहा सहारा

सरकारी अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ और जांच सुविधा उपलब्ध नहीं होने का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। हृदय संबंधी समस्या होने पर मरीजों और उनके परिजनों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। वहां डॉक्टर की फीस के साथ ईसीजी, ईको, टीएमटी सहित अन्य जांचों और उपचार पर होने वाला खर्च भी मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति और अधिक परेशानी वाली है।

महानिदेशक के आश्वासन के बाद भी नहीं हुई तैनाती

मई में स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय का निरीक्षण किया था। उस दौरान हृदय चिकित्सा केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती किए जाने की बात कही गई थी। इससे स्थानीय लोगों और मरीजों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही केंद्र में हृदय रोग विशेषज्ञ की सेवाएं शुरू हो सकेंगी, लेकिन कई महीने बीतने के बाद भी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि काशीपुर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी आबादी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर है। ऐसे में इतने पुराने हृदय चिकित्सा केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती कर ईसीजी, टीएमटी और ईको जैसी सुविधाओं को दोबारा शुरू किया जाना बेहद जरूरी है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से जल्द विशेषज्ञ की नियुक्ति करने के साथ बंद पड़ी मशीनों की जांच, मरम्मत और आवश्यकतानुसार उन्हें दोबारा उपयोग में लाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी अस्पताल में ही हृदय रोग की जांच और विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो मरीजों को निजी अस्पतालों की महंगी सेवाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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