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नन्हे-मुन्नों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने जीता ग्रैंडपेरेंट्स का दिल, अनुभवों की सीख और मनोरंजक खेलों ने बनाया दिन यादगार

काशीपुर। रिश्तों की गर्माहट, संस्कारों की खुशबू और नन्हे-मुन्नों की मासूम मुस्कान से मास्टर इंटरनेशनल स्कूल का परिसर उस समय भावनाओं से सराबोर हो उठा, जब विद्यालय में ग्रैंडपेरेंट्स डे का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दादा-दादी एवं नाना-नानी के सम्मान के साथ-साथ बच्चों और उनके ग्रैंडपेरेंट्स के बीच प्रेम, अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने का सुंदर प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशीपुर के बी.ई.ओ. श्री डी.के. साहू जी रहे। विद्यालय की प्रबंधिका श्रीमती शिल्पी गर्ग एवं प्रधानाचार्य डॉ. गौरव गर्ग जी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दादा-दादी एवं नाना-नानी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने पोते-पोतियों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। इसके बाद नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने अपने ग्रैंडपेरेंट्स के सम्मान में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मनमोहक श्रृंखला प्रस्तुत की।
ग्रैंडपेरेंट्स डे का सबसे आकर्षक केंद्र विद्यालय के छोटे बच्चे रहे। एल.के.जी. और यू.के.जी. के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ मंच पर अपनी प्रस्तुतियां दीं। नन्हे बच्चों की मासूम अदाओं, प्यारी मुस्कान और मनमोहक नृत्य ने उपस्थित दादा-दादी एवं नाना-नानी का दिल जीत लिया।
जैसे ही बच्चे मंच पर प्रस्तुति देने पहुंचे, ग्रैंडपेरेंट्स ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साह बढ़ाया। कई दादा-दादी अपने पोते-पोतियों को मंच पर देखकर भावुक हो उठे। बच्चों की प्रत्येक प्रस्तुति पर पूरा विद्यालय परिसर तालियों से गूंजता रहा।
इसके बाद कक्षा 1 एवं 2 के विद्यार्थियों ने शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति से वातावरण को उत्साह और उमंग से भर दिया। बच्चों की ऊर्जा और तालमेल ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा—ग्रैंडपेरेंट्स द्वारा अपने जीवन के अनुभव साझा करना। विद्यालय की ओर से दादा-दादी एवं नाना-नानी को मंच पर आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने अपने जीवन के कुछ यादगार पल बच्चों और उपस्थित लोगों के साथ साझा किए।
उन्होंने अपने बचपन, परिवार, संघर्ष और जीवन में प्राप्त अनुभवों के बारे में बताते हुए बच्चों को अनेक महत्वपूर्ण सीख दीं। किसी ने मेहनत का महत्व बताया तो किसी ने अनुशासन और समय की कीमत समझाई। किसी ने परिवार को साथ लेकर चलने की सीख दी तो किसी ने बड़ों के सम्मान और छोटों से प्रेम करने का संदेश दिया।
उनकी बातें केवल अनुभव नहीं थीं, बल्कि जीवन की वह पाठशाला थीं, जिसे किसी किताब में नहीं पढ़ाया जा सकता।
बच्चों ने भी बड़े उत्साह के साथ अपने ग्रैंडपेरेंट्स की बातें सुनीं। इस अवसर ने बच्चों को यह समझने का अवसर दिया कि उनके दादा-दादी और नाना-नानी उनके परिवार के वरिष्ठ सदस्य होने के साथ-साथ उनके जीवन के महत्वपूर्ण मार्गदर्शक भी हैं।
कार्यक्रम को केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित न रखते हुए विद्यालय की ओर से ग्रैंडपेरेंट्स के लिए विभिन्न रोचक एवं मनोरंजक खेलों का आयोजन भी किया गया।
दादा-दादी एवं नाना-नानी ने पूरे उत्साह के साथ खेलों में भाग लिया। कुछ गतिविधियों में बच्चों ने भी अपने ग्रैंडपेरेंट्स का साथ दिया। इस दौरान विद्यालय परिसर में हंसी, तालियों और उत्साह की गूंज सुनाई देती रही।
बच्चों के लिए भी यह क्षण बेहद खास था, क्योंकि उन्होंने अपने दादा-दादी एवं नाना-नानी को उनके साथ खेलते, मुस्कुराते और आनंद लेते देखा। इस गतिविधि ने पीढ़ियों के बीच की दूरी को कम करने और रिश्तों में और अधिक आत्मीयता लाने का कार्य किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बी.ई.ओ. श्री डी.के. साहू जी ने विद्यालय के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ग्रैंडपेरेंट्स परिवार की अमूल्य धरोहर हैं। उनके पास जीवन का इतना व्यापक अनुभव होता है, जो बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि आज के बदलते दौर में बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ पारिवारिक संस्कारों से जोड़ना भी आवश्यक है। दादा-दादी एवं नाना-नानी बच्चों को प्रेम, धैर्य, अनुशासन और जीवन-मूल्यों की शिक्षा सहज रूप से देते हैं।
उन्होंने बच्चों को संदेश दिया कि वे अपने ग्रैंडपेरेंट्स के साथ समय बिताएं, उनकी बातें सुनें और उनके अनुभवों से सीखें। उन्होंने कहा कि विद्यालय द्वारा आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों में संवेदनशीलता और पारिवारिक मूल्यों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्य अतिथि ने बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की भी प्रशंसा की और विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
विद्यालय की प्रबंधिका श्रीमती शिल्पी गर्ग ने अपने संबोधन में सभी दादा-दादी एवं नाना-नानी का स्वागत करते हुए कहा कि बच्चों के जीवन में ग्रैंडपेरेंट्स का स्थान सबसे खास रिश्तों में से एक है।
उन्होंने कहा कि दादा-दादी एवं नाना-नानी बच्चों को वह प्यार देते हैं, जिसमें अनुभव, अपनापन और संस्कार तीनों शामिल होते हैं। उनके साथ बिताया हुआ समय बच्चों के बचपन की सबसे खूबसूरत यादों का हिस्सा बन जाता है।
उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य बच्चों को केवल अकादमिक रूप से मजबूत बनाना नहीं, बल्कि उन्हें संवेदनशील, संस्कारी और अच्छे इंसान के रूप में विकसित करना भी है। ग्रैंडपेरेंट्स डे इसी उद्देश्य की एक सुंदर पहल है।
उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी ग्रैंडपेरेंट्स का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को वास्तव में विशेष और यादगार बना दिया।

विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. गौरव गर्ग ने कहा कि दादा-दादी और नाना-नानी बच्चों के लिए प्रेम, अनुभव और संस्कारों का अनमोल स्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच बच्चों और ग्रैंडपेरेंट्स के बीच संवाद बनाए रखना बहुत जरूरी है। बच्चों को अपने बुजुर्गों की बातें सुननी चाहिए, उनके अनुभवों को समझना चाहिए और उनसे जीवन की सीख लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि—
“बच्चों को किताबी ज्ञान स्कूल से मिलता है, लेकिन जीवन को समझने की कला अक्सर अपने बुजुर्गों से मिलती है।”
प्रधानाचार्य ने कहा कि विद्यालय भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, जिनसे बच्चों और उनके परिवार के बीच प्रेम, सम्मान और संस्कारों का रिश्ता और मजबूत हो।
उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और विशेष रूप से ग्रैंडपेरेंट्स का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान कई ऐसे क्षण भी आए, जब पूरा वातावरण भावुक हो गया। बच्चों ने अपने दादा-दादी एवं नाना-नानी के प्रति प्रेम व्यक्त किया और उनका आशीर्वाद लिया।
ग्रैंडपेरेंट्स ने भी बच्चों को गले लगाकर उन्हें उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। कई परिवारों ने इस खूबसूरत अवसर को तस्वीरों में कैद किया।
यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि तकनीक और आधुनिकता के दौर में भी पारिवारिक रिश्तों की गर्माहट और बुजुर्गों का स्नेह बच्चों के जीवन में उतना ही महत्वपूर्ण है।
ग्रैंडपेरेंट्स डे का आयोजन बच्चों के लिए केवल मनोरंजन का अवसर नहीं रहा, बल्कि यह उनके लिए एक जीवन-मूल्य आधारित सीखने का अनुभव भी बना।
कार्यक्रम ने बच्चों को यह संदेश दिया कि परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करना हमारी संस्कृति और संस्कारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दादा-दादी और नाना-नानी अपने अनुभवों के माध्यम से आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य के लिए तैयार कर सकते हैं।
मास्टर इंटरनेशनल स्कूल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यालय की उस सोच को भी सामने रखा, जिसमें शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, संवेदनशीलता, पारिवारिक मूल्यों और मानवीय रिश्तों को भी विशेष महत्व दिया जाता है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार की ओर से मुख्य अतिथि श्री डी.के. साहू जी, सभी दादा-दादी एवं नाना-नानी, अभिभावकों तथा शिक्षकों का आभार व्यक्त किया गया।
ग्रैंडपेरेंट्स ने विद्यालय द्वारा किए गए आयोजन की सराहना की और कहा कि अपने पोते-पोतियों को मंच पर देखकर उन्हें गर्व और खुशी का अनुभव हुआ। बच्चों के साथ खेलना, उनकी प्रस्तुतियां देखना और अपने अनुभव साझा करना उनके लिए एक यादगार अनुभव रहा।
वहीं ग्रांड पेरेंट्स दे के अवसर पर
समय के पाबंद रहने वाले ग्रांड पेरेंट्स के लिए प्रोत्साहन पुरस्कार भी समलित रहा जिसे वैष्णवी पाण्डेय की दादी श्रीमती शांति पांडेय जी ने समय पर पहुंचकर इस पुरस्कार को प्राप्त किया।
मास्टर इंटरनेशनल स्कूल का यह ग्रैंडपेरेंट्स डे वास्तव में रिश्तों, संस्कारों, प्रेम और पीढ़ियों के मिलन का उत्सव बन गया। नन्हे-मुन्ने बच्चों की मासूम प्रस्तुतियों से लेकर ग्रैंडपेरेंट्स के जीवन अनुभवों तक, हर पल ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
यह आयोजन बच्चों को एक महत्वपूर्ण संदेश देकर गया—दादा-दादी और नाना-नानी केवल परिवार का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारी जड़ों, संस्कारों और अनुभवों की सबसे अनमोल विरासत हैं।

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