


काशीपुर। उत्तराखंड राज्य में लगातार भर्ती घोटाले और यूकेएसएसएससी पेपर लीक प्रकरण से युवाओं में रोष उफान पर है। वे इस मामले में सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं लेकिन प्रशासन उनकी आवाज दबाने में लगा है। यह कहना है पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष संदीप सहगल का। उन्होंने बताया कि आज तमाम युवा पेपर लीक प्रकरण में विरोध दर्ज कराने के लिए अनुमति लेने एसडीएम कार्यालय पहुंचे किंतु उन्हें अनुमति देने से मना कर दिया गया। संदीप सहगल ने कहा कि इस मामले में वे युवाओं के साथ हैं क्योंकि वे बहुत परेशान है। ये मुद्दा किसी भी राजनीतिक पार्टी का मुद्दा नहीं है। ये मुद्दा है उन युवाओं का, जो हमारे उत्तराखंड और देश का भविष्य हैं। विरोध प्रदर्शन हेतु अनुमति न मिलने पर ये मेरे पास आए तो मैंने कहा कि आप अनुमति लेकर काम करो। विरोध प्रदर्शन करना हमारा मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि अनुमति न दिया जाना स्पष्ट बताता है कि उत्तराखंड प्रदेश में अघोषित इमर्जेंसी चल रही है। प्रदेश में सत्ता के खिलाफ कोई भी व्यक्ति अपनी बात नहीं बोल सकता। कोई विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकता हमारा घर लुट जाए, हमारा भविष्य लुट जाए। हम बर्बाद हो जाएं लेकिन हम अपनी आवाज नहीं उठा सकते। वहीं, महिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती पूजा सिंह ने कहा कि भारी संख्या में स्टूडेंट अनुमति लेने एसडीएम के पास आये लेकिन अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि यह विषय राजनीतिक नहीं है। यह हमारा मौलिक अधिकार है। हमारे प्रदेश के बच्चे जब कल को आईपीएस और पीसीएस बन जाते हैं तो तो हमारी सरकार बड़ी जोर से उनको अपने मंच पर बुलाकर शाबाशी देती है। प्रमाण पत्र देती है। उन्होंने उत्तराखंड में पेपर लीक प्रकरण को शर्मनाक और विरोध प्रदर्शन की अनुमति न दिये जाने को और भी शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि वे स्टूडेंट्स के साथ हैं। वहीं, मौजूदा स्टूडेंट्स ने कहा कि यूकेएसएससी पेपर लीक प्रकरण की सीबीआई जांच, दोषी अधिकारियों/नेताओं पर कड़ी कार्रवाई, सभी परीक्षाओं का पुनः पारदर्शी आयोजन किया जाए। स्टूडेंट्स ने इस मामले में राज्य सरकार और प्रशासन की जमकर निंदा की।

जुगनू खान
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