February 15, 2026
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काशीपुर।
उर्वशी दत्त बाली इन दिनों अपना जीवन उन 50 बच्चों के लिए समर्पित कर चुकी हैं, जो बिन मां बाप के हैं। किसी या बाप नहीं है तो किसी की मां नहीं। ये वो बालक है, जो हॉस्टल में नई शुरुआत कर रहे हैं। उर्वशी बाली ने अपने क्लब, किट्टी और सामाजिक कार्यक्रमों से दूरी बनाकर पूरी तरह इन बच्चों की देखभाल और उनके भविष्य निर्माण में खुद को लगा दिया है।

आज पापा बेकर्स की ओर से बच्चों को विशेष कुकिंग क्लास दी गई। जब बच्चों से पूछा गया कि क्या उन्होंने पहले कभी खाना बनाया है, तो उन्होंने मासूम आवाज़ में कहा कि मजबूरी में उन्होंने अपने भाई-बहनों के लिए कई बार खाना बनाया है। कुछ बच्चे बिन माँ-बाप के हैं, कुछ के माता-पिता काम पर रहते हैं, इसलिए वे खुद ही खाना बनाना सीख गए। बच्चों ने साफ कहा—
“हम यहाँ लड़ाई करने नहीं आए, अपना जीवन बनाने आए हैं।”

इन बच्चों में कई बिल्कुल अकेले हैं, लेकिन अब शहर के लोग ही उनका परिवार बनते जा रहे हैं।
डॉ. रवि सहोता, प्रेसिडेंट रोटरी क्लब ऑफ कार्बेट काशीपुर और अमन सहोता (sahota पेपर फ़ैक्टरी) से बच्चों के स्किल डेवलपमेंट के लिए ₹1 लाख का सामान प्रदान करते हुए कहा कि वे भी आज से हमेशा बच्चों के साथ खड़े रहेंगे।

ममता सिंह (ब्रिगेडियर सुखबीर सिंह की धर्मपत्नी) अपनी चार फौजी बहनों के साथ बच्चों से मिलीं और कहा कि वे अपनी पूरी क्षमता के साथ इन बच्चों की मदद करती रहेंगी।

शहर के लोग अलग-अलग तरीकों से योगदान दे रहे हैं।
किसी ने कपड़े दिए,
किसी ने पढ़ाई का सामान,
किसी ने ठंड से बचाने के लिए पर्दे और दरिया दी।
हर तरफ से यही आवाज़ उठ रही है—
“काशीपुर के ये 50 बच्चे अब अकेले नहीं हैं।”

हॉस्टल की प्रिंसिपल ज्योति राणा और पूरा स्टाफ इन बच्चों के लिए शिक्षक ही नहीं, बल्कि अभिभावक की तरह काम कर रहे हैं। वे बच्चों को सुरक्षा, स्नेह और अनुशासन—सब कुछ दे रहे हैं, उर्वशी दत्त बाली स्किल की क्लास लगा रही है, शांतनु चिकारा की इंग्लिश स्पीकिंग,usr इंदू समिति के दिव्यांग बच्चों के द्वारा स्किल्स ,जगमोहन बंटी द्वारा डांस, पापा बेकर्स की तरफ कुकिंग क्लासेस, रजनी ठाकुर जी स्टिचिंग की क्लासेस, संजीवनी हॉस्पिटल की तरफ से फर्स्ट एड क्लास,और स्कूल के सभी टीचर उन बच्चों पर मेहनत करके, उन चीजों को पक्का करवा रहे हैं।

अंत में उर्वशी दत्त बाली ने कहा—
“इन बच्चों पर खाने का पैसा मत लगाइए, सरकार भरपूर खाना ओर शिक्षा दे रही है… इन बच्चों को आपके समय और शाम के लिए एक्स्ट्रा शिक्षा के अलावा स्किल ओर स्किल सीखने के सामान की जरूरत है।
काशीपुर में यह उर्वशी दत्त बाली की पहल, लगातार बड़ा स्वरूप ले रही है और हर दिन पूरा शहर इन 50 बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए एकजुट होता दिख रहा है।

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