काशीपुर के पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले मुकुल मानव आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनका जीवन संघर्ष, मेहनत, आत्मबल और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा से भरा हुआ है। 5 जून 1971 को जन्मे मुकुल मानव का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। उनकी माता विद्यालय में कार्यरत थीं और परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी बड़ी ईमानदारी और मेहनत से निभाती थीं। लेकिन मुकुल मानव के जीवन में सबसे बड़ा दुख उस समय आया, जब उन्होंने अपने बाल्यकाल में ही अपने पिता को खो दिया। पिता के साए के बिना जीवन का सफर आसान नहीं था, लेकिन यही कठिनाइयां उनके व्यक्तित्व को मजबूत बनाती चली गईं। कम उम्र में ही मुकुल मानव ने जीवन के वास्तविक संघर्ष को करीब से देखा। जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद और पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में मात्र 10 वर्ष की अवस्था में मुकुल मानव साइकिल पर बैठकर घर-घर समाचार पत्र पहुंचाने का कार्य करते थे। सुबह जल्दी उठकर अखबार बांटना, फिर अपने अन्य कार्यों में लग जाना—यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। छोटी उम्र में जिम्मेदारियों का बोझ उठाना आसान नहीं होता, लेकिन मुकुल मानव ने हर चुनौती का डटकर सामना किया और कभी अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया।
समय के साथ उन्होंने समाज के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। सामाजिक सरोकारों और जनहित के मुद्दों के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता ने उन्हें सार्वजनिक जीवन की ओर भी प्रेरित किया। उन्होंने नगर निगम सभासद का चुनाव भी लड़ा, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वे केवल पत्रकारिता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि समाज की सेवा और जनहित के कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहते थे। जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें आवाज देना, उनके व्यक्तित्व की खास पहचान रही। पत्रकारिता के क्षेत्र में मुकुल मानव ने अपनी मेहनत, निष्पक्ष सोच और समाज के प्रति समर्पण के बल पर एक विशेष स्थान हासिल किया। काशीपुर में आज उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने हमेशा पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज का आईना और जनता की आवाज मानकर कार्य किया। उनकी लेखनी में सच्चाई, संवेदनशीलता और जनहित की भावना साफ दिखाई देती है, यही कारण है कि उन्होंने पत्रकारिता जगत में अपनी अलग छाप छोड़ी है। यदि उनके पारिवारिक जीवन की बात करें तो मुकुल मानव का जीवन आज सुख, संतोष और पारिवारिक मूल्यों से परिपूर्ण है। उनके परिवार में उनकी वृद्ध माता, धर्मपत्नी, दो पुत्रियां और एक पुत्र हैं। परिवार के प्रति उनका समर्पण और जिम्मेदारी निभाने का भाव उन्हें एक सफल पारिवारिक व्यक्ति भी बनाता है। जीवन के तमाम उतार-चढ़ाव देखने के बाद आज वह अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
लगभग 55 वर्ष की आयु में मुकुल मानव आज उस मुकाम पर हैं, जहां लोग उनके संघर्ष और सफलता की कहानी को प्रेरणा के रूप में देखते हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियां इंसान को कमजोर नहीं बनातीं, बल्कि यदि हौसला बुलंद हो तो वही कठिनाइयां सफलता की नींव बन जाती हैं। मुकुल मानव की जीवन यात्रा न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास का जीवंत उदाहरण भी है।

जुगनू खान
संपादक – जुगनू खबर
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