
काशीपुर। (जुगनू खान) हर वर्ष मानसून की पहली तेज बारिश के साथ ही काशीपुर शहर की वर्षो पुरानी और गंभीर समस्या फिर से सामने आ जाती है। मुख्य बाजारों और कई प्रमुख सड़कों पर थोड़ी ही देर की बारिश के बाद जलभराव हो जाता है। सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं, दुकानें प्रभावित होती हैं, वाहन रेंगने लगते हैं और आम नागरिकों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। यह दृश्य अब नया नहीं रहा, बल्कि हर वर्ष दोहराई जाने वाली एक ऐसी समस्या बन चुका है जिसका स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया है। मेरी नजर में इस स्थिति के लिए केवल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा, हालांकि प्रशासन की लापरवाही से भी इनकार नहीं किया जा सकता। वर्षों पुरानी और जर्जर जल निकासी व्यवस्था, समय पर नालों की सफाई न होना, सीवर लाइनों का रखरखाव न होना तथा वर्षा से पहले पर्याप्त तैयारी न करना निश्चित रूप से गंभीर कमियां हैं। यदि इन व्यवस्थाओं पर समय रहते प्रभावी ढंग से काम किया जाए तो जलभराव की समस्या काफी हद तक कम की जा सकती है। लेकिन एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि इस समस्या को बढ़ाने में हम नागरिक भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। आज भी लोग प्लास्टिक, घरेलू कचरा, निर्माण सामग्री का मलबा और अन्य अपशिष्ट खुलेआम नालियों में फेंक देते हैं। यही कचरा नालियों और सीवरों को जाम कर देता है। परिणाम यह होता है कि थोड़ी सी बारिश भी शहर की सड़कों पर पानी भरने का कारण बन जाती है। इसके अलावा शहर के कई प्राकृतिक जलमार्ग, तालाब अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं। जहां कभी वर्षा का पानी आसानी से निकल जाता था, वहां आज पक्के निर्माण खड़े हैं। जब पानी के प्राकृतिक रास्ते बंद हो जाएंगे तो बारिश का पानी आखिर जाएगा कहां? इसका जवाब हमें हर मानसून में जलभराव के रूप में मिल जाता है। हम सभी अक्सर यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच निकलते हैं कि “यह सरकार का काम है।” लेकिन क्या केवल सरकार या नगर निगम के भरोसे शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाया जा सकता है? मेरा मानना है कि इसका उत्तर नहीं है। जब तक हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक किसी भी योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। यदि हम अपने घर और दुकान का कचरा निर्धारित स्थान पर डालें, गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखें, प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करें, नालियों में कचरा न फेंकें और स्वच्छता अभियानों में सक्रिय भागीदारी करें, तो जलभराव जैसी समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव की नींव बनते हैं। प्रशासन को भी चाहिए कि मानसून से पहले नालों की व्यापक सफाई, सीवर लाइन की मरम्मत, जल निकासी व्यवस्था का आधुनिकीकरण तथा अतिक्रमण हटाने जैसे कार्यों को प्राथमिकता दे।

जुगनू खान
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