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22 राज्यों के शिक्षाविद जुटेंगे, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विद्यालय नेतृत्व पर होगा व्यापक मंथन

22 राज्यों के प्रतिनिधि जुटे, कश्मीर से कन्याकुमारी तक के शिक्षाविद एक मंच पर; विचारों के आदान-प्रदान से निकलेगा शिक्षा सुधार का रास्ता

रामनगर। हनुमान धाम छोई स्थित एलिगेंट रिसोर्ट में देशभर से आए शिक्षाविदों की उपस्थिति में ‘मंथन 2.0—विद्यालय नेतृत्व शिखर सम्मेलन उत्तराखंड’ के तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक बनाने, विद्यालयों के सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा करने तथा देशभर के विद्यालयों के बीच बेहतर शैक्षिक विचारों और अनुभवों के आदान-प्रदान को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेम्फोर्ड स्कूल के डायरेक्टर विनीत सिंघल, रामनगर पीरूमदारा ग्रेट मिशन स्कूल के डायरेक्टर प्रसून श्रीवास्तव, पायनियर अकैडमी के डायरेक्टर ललित रौतेला, नेशनल प्रेजिडेंट निसा एवं नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल एलायंस के कुलभूषण शर्मा, काशीपुर स्थित समर स्टडी हॉल स्कूल के अनुराग सिंह तथा शिवालिक होली माउंट अकैडमी के स्वामी बसंत बल्लभ भट्ट सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविद मौजूद रहे।

22 राज्यों के शिक्षाविदों के विचारों से निकलेगा नया रास्ता : ललित रौतेला

पायनियर अकैडमी के डायरेक्टर ललित रौतेला ने कहा कि मंथन 2.0 का उद्देश्य केवल एक सेमिनार आयोजित करना नहीं है, बल्कि देशभर के विद्यालयों और शिक्षाविदों को एक मंच पर लाकर शिक्षा व्यवस्था के वर्तमान स्वरूप पर गंभीरता से विचार करना है। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था पहले से ही निरंतर विकास के दौर से गुजर रही है, लेकिन बदलते समय, तकनीक, विद्यार्थियों की बदलती आवश्यकताओं और समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप इसमें लगातार सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 22 राज्यों से आए प्रतिनिधियों के साथ होने वाला आपसी मंथन इस कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। अलग-अलग राज्यों के विद्यालयों में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयोग, सफल मॉडल, विद्यालय प्रबंधन की व्यवस्थाएं, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रयास और सामने आ रही चुनौतियां एक-दूसरे के साथ साझा की जाएंगी। श्री रौतेला ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय अपने स्तर पर बेहतर कार्य कर रहा है, लेकिन यदि किसी विद्यालय या राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में कोई ऐसा प्रभावी विचार या व्यवस्था विकसित हुई है, जिसका लाभ अन्य विद्यालयों को भी मिल सकता है, तो उसे व्यापक स्तर पर साझा किया जाना चाहिए। इसी सोच के साथ मंथन 2.0 में विभिन्न क्षेत्रों से आए शिक्षाविदों के अनुभवों को एक मंच पर लाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि मंथन से जो सार्थक विचार और निष्कर्ष सामने आएंगे, उन्हें केवल किसी एक संस्था तक सीमित नहीं रखा जाएगा। प्रयास रहेगा कि इन विचारों और उपयोगी शैक्षिक पहलों को अधिक से अधिक विद्यालयों तक पहुंचाया जाए, ताकि देशभर के विद्यालय उनसे लाभान्वित हो सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा में सुधार तभी व्यापक रूप ले सकता है, जब अच्छे विचारों को साझा किया जाए और उन्हें विद्यालयों के स्तर पर व्यवहार में उतारा जाए।

मंथन-1 में तय बातों की भी होगी समीक्षा : अनुराग सिंह

समर स्टडी हॉल विद्यालय के अनुराग सिंह ने कहा कि मंथन का पहला आयोजन वर्ष 2022 में किया गया था। अब मंथन 2.0 के माध्यम से यह देखने का प्रयास किया जाएगा कि उस समय शिक्षा व्यवस्था को लेकर जिन विषयों और नीतिगत विचारों पर चर्चा हुई थी, उनमें से कितनी बातों को विद्यालयों में लागू किया गया और उनका वास्तविक प्रभाव क्या रहा। उन्होंने कहा कि केवल किसी नीति या विचार को स्वीकार कर लेना पर्याप्त नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि उसे विद्यालयों में किस प्रकार लागू किया गया, उसके परिणाम क्या रहे और यदि कहीं कोई कठिनाई आई तो उसे किस तरह दूर किया गया। मंथन 2.0 में इन्हीं बिंदुओं पर आत्ममंथन और समीक्षा की जाएगी। अनुराग सिंह ने कहा कि यदि कोई व्यवस्था सही दिशा में काम कर रही है तो उसके सकारात्मक अनुभव दूसरे विद्यालयों के साथ साझा किए जाने चाहिए और यदि किसी व्यवस्था के क्रियान्वयन में कमी रह गई है तो उसके कारणों पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंथन का उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं, बल्कि चर्चा से निष्कर्ष निकालकर उसे व्यवहारिक रूप देना है।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक शिक्षाविदों को एक मंच पर लाना बड़ी पहल : डॉ. शारदा कुमारी

एससीईआरटी, नई दिल्ली की डॉ. शारदा कुमारी ने कहा कि निसा द्वारा देश के 22 राज्यों के शिक्षाविदों को एक साथ एक मंच पर लाना अपने आप में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे शिक्षाविदों को एक स्थान पर बैठाकर शिक्षा व्यवस्था को लेकर विचार-विमर्श कराना केवल एक कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुभवों और विचारों को साझा करने का अवसर भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि ‘मंथन 2.0’ केवल नाम रख देने से इसकी सार्थकता सिद्ध नहीं होती। इसकी वास्तविक विशेषता यह है कि इसके माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने और उनके अनुभवों को साझा करने का प्रयास किया गया है। डॉ. शारदा कुमारी ने कहा कि अलग-अलग राज्यों की अपनी शैक्षिक परिस्थितियां, चुनौतियां और कार्यप्रणालियां हैं। ऐसे में जब विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षाविद एक साथ बैठते हैं तो उन्हें एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का संवाद शिक्षा व्यवस्था में नए विचारों और बेहतर कार्यप्रणाली के लिए आधार तैयार कर सकता है।
उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए केवल सरकार या किसी एक संस्था के स्तर पर प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। विद्यालय प्रबंधन, शिक्षक, शिक्षाविद और शिक्षा से जुड़े विभिन्न पक्ष जब मिलकर विचार करेंगे, तभी व्यापक स्तर पर सुधार की संभावनाएं मजबूत होंगी।

शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए सामूहिक चिंतन पर जोर

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। तकनीकी शिक्षा, नई शिक्षण पद्धतियां, विद्यार्थियों की बदलती जरूरतें, शिक्षक प्रशिक्षण, विद्यालय नेतृत्व और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसे विषयों पर निरंतर संवाद की आवश्यकता है।
शिक्षाविदों ने कहा कि विद्यालयों में बेहतर व्यवस्था के लिए एक-दूसरे के अनुभवों से सीखना और सफल प्रयोगों को साझा करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से मंथन 2.0 में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों के बीच विचारों का व्यापक आदान-प्रदान किया जाएगा।
इस दौरान विनीत सिंघल, प्रसून श्रीवास्तव, कुलभूषण शर्मा और स्वामी बसंत बल्लभ भट्ट ने भी शिक्षा व्यवस्था, विद्यालय नेतृत्व और विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य को लेकर अपने विचार रखे।
अब सभी की नजरें मंथन 2.0 के तहत आयोजित होने वाले एक दिवसीय शिखर सम्मेलन के निष्कर्षों पर टिकी हैं। विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविद आपसी विचार-विमर्श के बाद शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किन बिंदुओं पर सहमति बनाते हैं और उन विचारों को विद्यालयों तक किस रूप में पहुंचाया जाता है, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी। सम्मेलन से निकलने वाले निष्कर्ष शिक्षा के क्षेत्र में किस प्रकार व्यवहारिक बदलाव का आधार बनते हैं, इस पर भी सभी की निगाहें रहेंगी।

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