October 22, 2026
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वसुधैव कुटुम्बकम्, काशीपुर के सेवा अभियान में 64वाँ नेत्रदान संपन्न

काशीपुर। किसी अपने को खोने की पीड़ा के बीच दूसरों का जीवन सँवारने का संकल्प लेना मानवीय संवेदनाओं का अनुपम उदाहरण है। ब्रह्मलीन श्रीमती विमला ढींगरा जी के परिजनों ने उनके मरणोपरांत नेत्रदान की सहमति देकर ऐसा ही प्रेरणादायी संदेश दिया है। वसुधैव कुटुम्बकम्, काशीपुर के तत्वावधान में संपन्न यह संस्था का 64वाँ नेत्रदान है।

स्वर्गीय विमला ढींगरा जी के पुत्रगण श्री विजय ढींगरा जी, श्री अशोक ढींगरा जी, श्री अनिल ढींगरा जी एवं श्री प्रमोद ढींगरा जी ने इस पुनीत कार्य के लिए सहमति प्रदान की। परिवार के इस संवेदनशील निर्णय से दो लोगों को दृष्टि मिलने की आशा जगी है। साथ ही समाज को यह संदेश मिला है कि दिवंगत प्रियजन की स्मृति को मानव सेवा के माध्यम से सार्थक बनाया जा सकता है।

इस सेवाकार्य को संपन्न कराने में समाजसेवी श्री सुनील वाठला जी का विशेष योगदान रहा। उन्होंने नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समय पर मिली सही जानकारी और परिवार की सहमति किसी जरूरतमंद के लिए नई उम्मीद बन सकती है। ऐसे कार्यों में समाज के प्रत्येक जागरूक व्यक्ति का सहयोग महत्त्वपूर्ण है।

संस्था के संस्थापक सदस्य श्री अजय अग्रवाल जी ने बताया कि वसुधैव कुटुम्बकम् का प्रयास नेत्रदान संपन्न कराने के साथ-साथ इसके प्रति लोगों की झिझक और भ्रांतियाँ दूर करना भी है। संस्था परिवारों तक सही जानकारी पहुँचाने और आवश्यकता पड़ने पर नेत्रदान सहायता से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दान किए जाने वाले कॉर्निया की चिकित्सकीय उपयुक्तता का अंतिम निर्णय नेत्र बैंक की विशेषज्ञ टीम करती है।

संस्था के पदाधिकारियों ने ढींगरा परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि दुःख के कठिन क्षणों में लिया गया उनका निर्णय समाज के लिए प्रेरणा है। किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में उजाला लाने की यह भावना सेवा और करुणा के प्रति परिवार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

संस्था के संरक्षक श्री योगेश जिंदल जी, अध्यक्ष श्री विकास जैन जी, सचिव श्री प्रियांशु बंसल जी, कोषाध्यक्ष श्री सौरभ अग्रवाल जी, संस्थापक सदस्य श्री अजय अग्रवाल जी तथा श्री दीपक मित्तल जी, श्री आशीष गुप्ता जी, श्री अनुज सिंघल जी, श्री अंकुर मित्तल जी, श्री आशीष पैगिया जी एवं सीए सचिन अग्रवाल जी ने ब्रह्मलीन श्रीमती विमला ढींगरा जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने दिवंगत आत्मा की चिरशांति और शोकसंतप्त परिवार को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

वसुधैव कुटुम्बकम् ने क्षेत्रवासियों से आग्रह किया कि वे नेत्रदान के विषय में अपने परिवार में चर्चा करें और दूसरों को भी जागरूक बनाएँ। मरणोपरांत नेत्रदान के संबंध में जानकारी एवं सहायता के लिए संस्था की टीम से संपर्क किया जा सकता है।

नेत्रदान सहायता—24×7
9837080678 | 9548799947

शोक की घड़ी में ढींगरा परिवार का प्रेरक निर्णय, विमला जी की स्मृति से जुड़ेगा दृष्टि का उजाला

वसुधैव कुटुम्बकम्, काशीपुर के सेवा अभियान में 64वाँ नेत्रदान संपन्न

काशीपुर। किसी अपने को खोने की पीड़ा के बीच दूसरों का जीवन सँवारने का संकल्प लेना मानवीय संवेदनाओं का अनुपम उदाहरण है। ब्रह्मलीन श्रीमती विमला ढींगरा जी के परिजनों ने उनके मरणोपरांत नेत्रदान की सहमति देकर ऐसा ही प्रेरणादायी संदेश दिया है। वसुधैव कुटुम्बकम्, काशीपुर के तत्वावधान में संपन्न यह संस्था का 64वाँ नेत्रदान है।

स्वर्गीय विमला ढींगरा जी के पुत्रगण श्री विजय ढींगरा जी, श्री अशोक ढींगरा जी, श्री अनिल ढींगरा जी एवं श्री प्रमोद ढींगरा जी ने इस पुनीत कार्य के लिए सहमति प्रदान की। परिवार के इस संवेदनशील निर्णय से दो लोगों को दृष्टि मिलने की आशा जगी है। साथ ही समाज को यह संदेश मिला है कि दिवंगत प्रियजन की स्मृति को मानव सेवा के माध्यम से सार्थक बनाया जा सकता है।

इस सेवाकार्य को संपन्न कराने में समाजसेवी श्री सुनील वाठला जी का विशेष योगदान रहा। उन्होंने नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समय पर मिली सही जानकारी और परिवार की सहमति किसी जरूरतमंद के लिए नई उम्मीद बन सकती है। ऐसे कार्यों में समाज के प्रत्येक जागरूक व्यक्ति का सहयोग महत्त्वपूर्ण है।

संस्था के संस्थापक सदस्य श्री अजय अग्रवाल जी ने बताया कि वसुधैव कुटुम्बकम् का प्रयास नेत्रदान संपन्न कराने के साथ-साथ इसके प्रति लोगों की झिझक और भ्रांतियाँ दूर करना भी है। संस्था परिवारों तक सही जानकारी पहुँचाने और आवश्यकता पड़ने पर नेत्रदान सहायता से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दान किए जाने वाले कॉर्निया की चिकित्सकीय उपयुक्तता का अंतिम निर्णय नेत्र बैंक की विशेषज्ञ टीम करती है।

संस्था के पदाधिकारियों ने ढींगरा परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि दुःख के कठिन क्षणों में लिया गया उनका निर्णय समाज के लिए प्रेरणा है। किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में उजाला लाने की यह भावना सेवा और करुणा के प्रति परिवार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

संस्था के संरक्षक श्री योगेश जिंदल जी, अध्यक्ष श्री विकास जैन जी, सचिव श्री प्रियांशु बंसल जी, कोषाध्यक्ष श्री सौरभ अग्रवाल जी, संस्थापक सदस्य श्री अजय अग्रवाल जी तथा श्री दीपक मित्तल जी, श्री आशीष गुप्ता जी, श्री अनुज सिंघल जी, श्री अंकुर मित्तल जी, श्री आशीष पैगिया जी एवं सीए सचिन अग्रवाल जी ने ब्रह्मलीन श्रीमती विमला ढींगरा जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने दिवंगत आत्मा की चिरशांति और शोकसंतप्त परिवार को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

वसुधैव कुटुम्बकम् ने क्षेत्रवासियों से आग्रह किया कि वे नेत्रदान के विषय में अपने परिवार में चर्चा करें और दूसरों को भी जागरूक बनाएँ। मरणोपरांत नेत्रदान के संबंध में जानकारी एवं सहायता के लिए संस्था की टीम से संपर्क किया जा सकता है।

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