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काशीपुर। बदलती जीवनशैली, खानपान में बढ़ती लापरवाही और समय पर इलाज न मिलने के कारण बच्चों में कई गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अक्सर अभिभावक बच्चों की सामान्य दिखाई देने वाली परेशानियों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही छोटी समस्याएं आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती हैं। बच्चों में बढ़ते संक्रमण, पेट संबंधी बीमारियों, यूरिन इंफेक्शन और कब्ज जैसी समस्याओं को लेकर काशीपुर के मुरादाबाद रोड स्थित सहोता मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में कार्यरत प्रसिद्ध पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. गर्विता सिंह ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी।
डॉ. गर्विता सिंह ने बताया कि वे जन्म से लेकर 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों का इलाज और जटिल सर्जरी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समय रहते पहचान लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि देर होने पर कई बार ऑपरेशन तक की नौबत आ जाती है। उन्होंने बताया कि वे पूर्व में लगभग छह वर्षों तक देश के प्रतिष्ठित नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं और अब सहोता मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में बच्चों के लिए आधुनिक उपचार सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं।

टाइफाइड इंफेक्शन बच्चों में तेजी से बढ़ रहा

डॉ. गर्विता सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों में टाइफाइड संक्रमण बेहद सामान्य होता जा रहा है, लेकिन कई अभिभावक शुरुआती लक्षणों को हल्के में ले लेते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास ऐसे कई बच्चे इलाज के लिए पहुंचे, जिनमें संक्रमण काफी बढ़ चुका था। संक्रमण के कारण बच्चों के पेट में सूजन आ गई और आंतों में गंभीर संक्रमण हो गया। कुछ मामलों में स्थिति इतनी खराब हो गई कि आंतें तक फट गईं और बच्चों की जान बचाने के लिए तत्काल सर्जरी करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि लगातार बुखार, उल्टी, पेट दर्द, कमजोरी, भूख न लगना और पेट फूलना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से बड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीबायोटिक दवाओं का पूरा कोर्स पूरा करना बेहद जरूरी है। बीच में दवा बंद करने से संक्रमण दोबारा गंभीर रूप ले सकता है।

बच्चों में बढ़ रहा यूरिन इंफेक्शन

डॉ. गर्विता सिंह ने बताया कि आजकल बच्चों में यूरिन इंफेक्शन यानी मूत्र संक्रमण के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। कई बार माता-पिता इसे सामान्य बुखार समझकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि यह किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे को बार-बार बुखार आता हो, पेशाब करते समय जलन होती हो, पेशाब रुक-रुक कर आता हो, पेट या कमर में दर्द हो या बच्चा बार-बार रोता हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। कई बच्चों में यूरिन बार-बार किडनी की तरफ चढ़ने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में “रिफ्लक्स” कहा जाता है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में यूरिन रुकावट, जन्मजात समस्याएं और किडनी की कार्यक्षमता कम होना भी इसी संक्रमण की वजह से सामने आता है। इसलिए समय रहते जांच और उपचार बहुत जरूरी है।

कब्ज को सामान्य समझना बड़ी गलती

डॉ. गर्विता सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों में कब्ज की समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि लगभग हर दस में से नौ बच्चों में कब्ज की शिकायत देखने को मिल रही है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकतर अभिभावक इसे सामान्य मान लेते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि बच्चा दो या तीन दिन में शौच कर रहा है और शौच करते समय उसे जोर लगाना पड़ रहा है, दर्द हो रहा है, बच्चा रो रहा है या शौच बहुत सख्त हो रहा है तो यह कब्ज के लक्षण हैं। लंबे समय तक कब्ज रहने से आंतों पर असर पड़ता है और ब्लैडर पर दबाव बढ़ने लगता है। उन्होंने बताया कि ब्लैडर पर दबाव बढ़ने से बच्चों में यूरिन इंफेक्शन और किडनी संबंधी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। कई बार बच्चे पेट दर्द, भूख न लगना और चिड़चिड़ापन जैसी परेशानियों से भी जूझने लगते हैं। खानपान और लाइफस्टाइल पर दें विशेष ध्यान
डॉ. गर्विता सिंह ने कहा कि बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए उनके खानपान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह देते हुए कहा कि बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं, जंक फूड से दूर रखें और भोजन में हरी सब्जियां, फल, सलाद और फाइबर युक्त चीजें शामिल करें।
उन्होंने कहा कि मोबाइल और टीवी के कारण बच्चों की शारीरिक गतिविधियां कम हो गई हैं, जिसका असर उनके पाचन तंत्र पर भी पड़ रहा है। बच्चों को खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना चाहिए।

समय पर इलाज ही सबसे बड़ा बचाव

अंत में डॉ. गर्विता सिंह ने कहा कि बच्चों की छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज करना कई बार खतरनाक साबित हो सकता है। यदि समय रहते सही डॉक्टर से सलाह लेकर इलाज कराया जाए तो बड़ी सर्जरी और गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें और किसी भी असामान्य लक्षण को हल्के में न लें।

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