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काशीपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, ऊधमसिंहनगर ने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को मृतक खाताधारक की पत्नी को बीमा राशि का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर दुर्घटना बीमा की धनराशि के साथ मानसिक क्षति एवं वाद व्यय की राशि भी अदा करने का निर्देश दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीमती बतूल बेगम, पत्नी स्वर्गीय मोहम्मद शरीफ, निवासी ग्राम बरखेड़ा पांडे (वर्तमान पता सिद्धीकी मार्केट, काशीपुर) ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर कर बताया था कि उनके पति मोहम्मद शरीफ का प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत दो लाख रुपये का दुर्घटना बीमा था। उनका बैंक खाता यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, शाखा काशीपुर में संचालित था, जिसमें से बीमा योजना का प्रीमियम भी नियमित रूप से काटा गया था। परिवाद के अनुसार, 2 अक्टूबर 2023 को श्मशान घाट के पास हुई एक सड़क दुर्घटना में मोहम्मद शरीफ गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनकी बाद में मृत्यु हो गई। घटना के बाद पुलिस द्वारा पंचनामा, पोस्टमार्टम एवं अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई तथा दुर्घटना की रिपोर्ट भी दर्ज की गई। पति की मृत्यु के बाद श्रीमती बतूल बेगम ने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत बीमा क्लेम प्राप्त करने के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में आवेदन प्रस्तुत किया। आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उन्हें बीमा राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने 7 दिसंबर 2024 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, ऊधमसिंहनगर में वाद दायर किया। मामले में शाखा प्रबंधक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, काशीपुर तथा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को पक्षकार बनाया गया। आयोग द्वारा दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना गया। मामले की सुनवाई के दौरान परिवादनी की ओर से अधिवक्ता अब्दुल सलीम ने प्रभावी पैरवी करते हुए अपने तर्क प्रस्तुत किए। दिनांक 8 जून 2026 को हुई अंतिम बहस के बाद आयोग ने अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को निर्देशित किया कि वह परिवादनी को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत 2 लाख रुपये की बीमा राशि, 5 हजार रुपये मानसिक क्षति के लिए तथा 2 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में अदा करे। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि उक्त राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर किया जाए। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है, तो बीमा कंपनी को 7 दिसंबर 2024 (परिवाद दायर करने की तिथि) से लेकर अंतिम भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ पूरी राशि का भुगतान करना होगा।

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