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काशीपुर। भारतीय ज्ञान-परंपरा, ज्योतिष और वास्तु को लेकर समाज में प्रचलित अनेक भ्रांतियों के बीच आचार्य डॉ. महेंद्र सिंह गोले की नई पुस्तक “ज्योतिष और वास्तु : एक अनकहा सत्य” प्रकाशित हुई है। यह पुस्तक पारंपरिक शास्त्रीय ज्ञान को आधुनिक तार्किक, मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने का एक गंभीर प्रयास है।

लेखक का मानना है कि वर्तमान समय में ज्योतिष और वास्तु को प्रायः भय, अंधविश्वास और त्वरित उपायों तक सीमित कर दिया गया है, जबकि भारतीय शास्त्र इन विषयों को कहीं अधिक व्यापक संदर्भ में देखते हैं। पुस्तक में वेद, उपनिषद, भगवद्गीता, महाभारत, रामायण, पुराण, वेदाङ्ग ज्योतिष तथा प्राचीन वास्तु ग्रंथों के आधार पर यह समझाने का प्रयास किया गया है कि ज्योतिष भविष्य बताने का माध्यम मात्र नहीं, बल्कि समय की प्रवृत्तियों को समझने का विज्ञान है। इसी प्रकार वास्तु को केवल दिशाओं का विज्ञान न मानकर प्रकृति, पंचमहाभूत, मानव व्यवहार और चेतना के संतुलन से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है।

लगभग 30 अध्यायों में विभाजित यह पुस्तक कर्म, प्रारब्ध, पुरुषार्थ, चेतना, काल, पंचमहाभूत, दिशाओं के मनोवैज्ञानिक प्रभाव, वास्तु के वास्तविक सिद्धांत, उपायों की शास्त्रीय भूमिका, अंधविश्वास, भय-आधारित बाजारीकरण तथा आत्मबोध जैसे विषयों पर संतुलित और शोधपरक चर्चा करती है। पुस्तक का केंद्रीय संदेश है कि ग्रह संकेतक हैं, नियंत्रक नहीं; दिशा प्रवृत्ति है, दंड नहीं; कर्म उत्तरदायित्व है और पुरुषार्थ भविष्य की पुनर्रचना की क्षमता।

आचार्य डॉ. महेंद्र सिंह गोले वर्षों से वास्तु, ज्योतिष, भारतीय दर्शन तथा मानव व्यवहार के व्यावहारिक अध्ययन से जुड़े रहे हैं। वे हिंदी समाचार-पत्रों में भी नियमित रूप से लेख लिखते रहे हैं, जिनमें ज्योतिष और वास्तु से संबंधित प्रचलित भ्रांतियों का तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत किया जाता है। उनका उद्देश्य भय नहीं, बल्कि विवेक, संतुलन और शास्त्रीय समझ को समाज तक पहुँचाना है।

लेखक का स्पष्ट मत है कि किसी भी शास्त्र का उद्देश्य मनुष्य को भयभीत या भाग्यवादी बनाना नहीं, बल्कि उसे अधिक सजग, उत्तरदायी और आत्मविश्वासी बनाना है। इसी विचार को आधार बनाकर पुस्तक में बार-बार यह स्थापित किया गया है कि वास्तविक परिवर्तन बाहरी उपायों से अधिक आंतरिक चेतना, संतुलित कर्म और विवेकपूर्ण जीवन-दृष्टि से संभव होता है।

यह पुस्तक स्वर्गीय पूज्य पितृदेव श्री केशरी लाल आर्य तथा मातृदेवी श्रीमती भगवान दई की पावन स्मृति को समर्पित है। लेखक ने इसे भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धांजलि तथा समाज के लिए एक चिंतनशील योगदान बताया है।

“ज्योतिष और वास्तु : एक अनकहा सत्य” अब पाठकों के लिए उपलब्ध है। यह पुस्तक उन सभी पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती है जो ज्योतिष और वास्तु को अंधविश्वास के बजाय शास्त्रीय, तार्किक और दार्शनिक दृष्टि से समझना चाहते हैं।

— जारीकर्ता:
आचार्य डॉ. महेंद्र सिंह गोले
लेखक | शोधकर्ता | वास्तु एवं ज्योतिष अध्येता

लेखक परिचय

आचार्य डॉ. महेंद्र सिंह गोले लेखक, शोधकर्ता, सिविल इंजीनियर तथा वास्तु एवं ज्योतिष के व्यावहारिक अध्येता हैं। भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद, भगवद्गीता और वास्तु शास्त्र के गहन अध्ययन के आधार पर वे ज्योतिष और वास्तु को भय एवं अंधविश्वास से मुक्त, तार्किक और शास्त्रसम्मत दृष्टि से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। हिंदी समाचार-पत्रों में उनके लेख नियमित रूप से प्रकाशित होते रहे हैं। उनकी नवीन पुस्तक “ज्योतिष और वास्तु : एक अनकहा सत्य” कर्म, चेतना और भारतीय ज्ञान-परंपरा पर आधारित एक शोधपरक एवं चिंतनशील कृति है।

बुक खरीदने का लिंक
Jyotish aur Vastu- Ek Unkaha Satya / ज्योतिष और वास्तु -एक अनकहा सत्य: A Philosophical Exploration of Karma, Astrology and Vastu https://amzn.in/d/02hSif11

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