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समायोजन, ₹57,700 वेतन और आयोग की परिधि से बाहर रखने की मांग; मुख्यमंत्री से मिलने का मांगा समय

देहरादून, 07 अगस्त। उच्च शिक्षा विभाग की वर्ष 2014 से 2022 तक की व्यवस्था से प्रभावित एवं वर्तमान में कार्यरत अस्थायी शिक्षकों का संघर्ष तेज हो गया है। वर्षों से सेवा देने के बावजूद समायोजन, सम्मानजनक वेतन और सेवा सुरक्षा का स्थायी समाधान नहीं होने से शिक्षकों में आक्रोश है। शिक्षकों ने सरकार से स्पष्ट कहा है कि अब आश्वासन नहीं, ठोस निर्णय चाहिए।

शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने उच्च शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, मांगों के समाधान को लेकर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री श्री सौरभ बहुगुणा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, मंत्री ने सचिव से भी इस मामले में वार्ता की है। सचिव से लगभग तीन दिन बाद मुलाकात का समय दिए जाने की बात कही गई है। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भी मिलने का समय मांगा है।

शिक्षकों की तीन प्रमुख मांगें हैं—नियमित प्राध्यापक के आने पर पद प्रभावित होने की स्थिति में उचित समायोजन, सभी कार्यरत अस्थायी शिक्षकों के लिए ₹57,700 प्रतिमाह वेतन तथा पदों को आयोग की परिधि से बाहर रखना।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कई शिक्षक पिछले लगभग दो वर्षों से समायोजन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों तक उच्च शिक्षा व्यवस्था को अपनी सेवाएं देने के बावजूद उनका भविष्य असुरक्षित बना हुआ है।

शिक्षक प्रतिनिधियों ने सरकार से सवाल किया कि जब वर्षों तक उनकी सेवाओं की आवश्यकता रही, तो उनके भविष्य की जिम्मेदारी से अब क्यों पीछे हट रही है? उन्होंने कहा कि यह केवल वेतन या पद का मामला नहीं, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के सम्मान, रोजगार और सुरक्षित भविष्य का प्रश्न है।

शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो संघर्ष को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने सभी प्रभावित एवं कार्यरत शिक्षकों से संख्या बल के साथ देहरादून पहुंचने और एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष में भाग लेने की अपील की।

शिक्षक प्रतिनिधियों ने कहा— “वर्षों की सेवा के बाद अब केवल आश्वासन स्वीकार नहीं होगा। सरकार को स्पष्ट नीति बनाकर ठोस निर्णय लेना होगा। जब तक न्यायपूर्ण समाधान नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा।”

प्रतिनिधिमंडल में डॉ. रोहित, डॉ. मोहित, डॉ. मनोज, डॉ. शैलेश, डॉ. सरन, डॉ. प्रवेश, डॉ. चिंतामणि, डॉ. राकेश, डॉ. ममता, डॉ. जयहरी, डॉ. रणजीत, डॉ. ब्रह्मराज, डॉ. बबलू, डॉ. बिपिन, डॉ. प्रियंका, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. ममता सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

— शिक्षक प्रतिनिधिमंडल

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