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काशीपुर। ‘एक तू सच्चा, तेरा नाम सच्चा’ मंत्र के ऋषि सत्पुरुष बाबा फूलसंदे वाले ने सत्संग में श्रद्धालुओं को धर्म, पुण्य कर्म और परमात्मा के नाम के सिमरन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का शरीर पाप और पुण्य का रथ है, जिस पर ज्योति स्वरूप आत्मा सवार है। जिस मनुष्य ने धर्म को अपना सारथी बनाया, वही भवसागर और जन्म-मरण के बंधन से पार हो सकता है। बाबा फूलसंदे वाले ने कहा कि जो व्यक्ति शुभ एवं पुण्य कर्मों को अपना हमसफर बना लेता है, वही परमात्मा के द्वार तक पहुंचता है। सतगुरु की सीख पर चलने वाले मनुष्य का जीवन सही दिशा में आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि निराकार परमात्मा के नाम का निरंतर सिमरन करने से आत्मा का प्रकाश बढ़ता चला जाता है और मन में अज्ञान का अंधकार दूर होकर उजियारा फैलता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन कटे-फटे कागज अथवा वस्त्र के समान है, जिसे परमात्मा अपनी कृपा से बार-बार संवारता रहता है। जो व्यक्ति हर सांस के साथ आदि देव परमेश्वर का सिमरन करता है, परमात्मा उसके निकट हो जाता है और उसे अपना मित्र बना लेता है। बाबा ने कहा कि पाप आचरण करने वाला मनुष्य अज्ञान के अंधकार की ओर बढ़ता चला जाता है। जिन लोगों के हृदय, शरीर और विचारों में विष भरा रहता है, उनकी बुद्धि बार-बार ठोकर खाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन को परमात्मा को समर्पित करते हुए सद्कर्म, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलें। उन्होंने गुरु की महिमा बताते हुए कहा कि ब्रह्म रूप गुरु के चरणों की छाया में कीकर भी चंदन बन जाता है और शिव जैसे गुरु की प्राप्ति होने पर जीवन के कांटे भी मधुबन में बदल जाते हैं। परम पुरुष पूर्ण धनी सच्चे सतगुरु का प्रकाश आत्मा में सदैव उजियारा करता रहता है। बाबा फूलसंदे वाले ने कहा कि वर्तमान में दुनिया मनुष्य को सुनहरी और सुहावनी दिखाई देती है, लेकिन मृत्यु की छाया दिखाई नहीं देती। इसलिए धर्म के आचरण और सत्कर्मों की बात कई बार लोगों को कहानी जैसी लगती है। उन्होंने कहा कि जिसके सिर पर पारब्रह्म रूप गुरु का हाथ होता है, उसका जीवन सफल हो जाता है और उसका बेड़ा पार हो जाता है, जबकि मनमाना आचरण और पाप कर्म मनुष्य को पतन की ओर ले जाते हैं। सत्संग के पश्चात अनेक श्रद्धालुओं ने बाबा फूलसंदे वाले से दीक्षा ग्रहण की और परमात्मा के नाम का सिमरन करते हुए धर्म एवं सद्कर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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