निर्जला व्रत से हो सकती है शरीर में पानी की कमी, गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य और पोषण को प्राथमिकता देना जरूरी
काशीपुर। करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है। पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं। हालांकि, गर्भवती महिलाओं के लिए निर्जला व्रत रखना स्वास्थ्य के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए सहोता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की वरिष्ठ स्त्री रोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ डॉ. नवप्रीत कौर सहोता ने गर्भवती महिलाओं को करवा चौथ के दौरान अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। डॉ. सहोता के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर को नियमित रूप से ऊर्जा, पानी और आवश्यक पोषक तत्वों की जरूरत होती है। लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने से शरीर में पानी की कमी, कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में गर्भवती महिला के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान व्रत रखने का निर्णय लेने से पहले अपनी चिकित्सक से परामर्श करना जरूरी है। डॉ. नवप्रीत कौर सहोता ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को सरगी में पौष्टिक और संतुलित आहार लेना चाहिए। दूध, बादाम, अखरोट और अन्य उपयुक्त खाद्य पदार्थ ऊर्जा एवं पोषण प्रदान कर सकते हैं। वहीं, अधिक मीठे, तले-भुने और अत्यधिक तेल वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करना बेहतर है। गर्भावस्था में खान-पान का चयन महिला की स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन बेहद जरूरी है। यदि चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त हो, तो नारियल पानी, छाछ और अन्य सुरक्षित तरल पदार्थ लिए जा सकते हैं। ताजे फल और संतुलित आहार भी शरीर को आवश्यक पोषण देने में मदद करते हैं। हालांकि, गर्भावस्था में कुछ खाद्य पदार्थों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और फलों का सेवन अच्छी तरह धोकर करना चाहिए। डॉ. सहोता ने गर्भवती महिलाओं को आगाह किया कि व्रत के दौरान अत्यधिक चक्कर आना, आंखों के सामने अंधेरा छाना, बेहोशी जैसा महसूस होना, तेज सिरदर्द, घबराहट या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। गर्भस्थ शिशु की हलचल में सामान्य से अचानक कमी महसूस होने पर भी बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि गर्भावस्था में शुगर, उच्च रक्तचाप या अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से जूझ रही महिलाओं को बिना चिकित्सकीय सलाह के उपवास नहीं रखना चाहिए। ऐसी महिलाओं के लिए लंबे समय तक भोजन और पानी से दूर रहना जोखिमपूर्ण हो सकता है। डॉ. नवप्रीत कौर सहोता ने कहा कि करवा चौथ आस्था और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान मां और गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य सर्वोपरि होना चाहिए। परिवार के सदस्यों को भी गर्भवती महिलाओं की स्थिति को समझते हुए उन पर निर्जला व्रत रखने का दबाव नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि गर्भवती महिलाएं अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही व्रत का निर्णय लें और जरूरत पड़ने पर व्रत छोड़ने में संकोच न करें। सही पोषण, पर्याप्त तरल पदार्थ, आराम और समय पर चिकित्सकीय परामर्श के जरिए मां और बच्चे की सेहत का बेहतर ध्यान रखा जा सकता है।

जुगनू खान
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