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काशीपुर। रोडवेज बस डिपो की बदहाल स्थिति को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार सिंह ने सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की विकास विरोधी सोच के कारण कभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त रहा काशीपुर बस अड्डा आज खंडहर में तब्दील हो चुका है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हरीश कुमार सिंह ने कहा कि वर्ष 1982 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के प्रयासों से निर्मित यह विशाल बस स्टेशन आज अपनी पहचान खोता जा रहा है। यात्रियों को यह तक पता नहीं चल पाता कि उन्हें अपने गंतव्य तक जाने के लिए बस कहां से मिलेगी। बस अड्डे पर न तो पर्याप्त यात्री सुविधाएं हैं और न ही शौचालय एवं कैंटीन जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि बस डिपो में कर्मचारियों की भारी कमी है और अधिकांश बसों की स्थिति भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है। अधिवक्ता हरीश कुमार सिंह ने यह भी कहा कि कभी काशीपुर से नैनीताल के लिए नियमित बस सेवा संचालित होती थी, लेकिन वह भी वर्षों पहले बंद हो चुकी है। उनका आरोप है कि कांग्रेस शासनकाल में स्थापित कई महत्वपूर्ण संस्थान और विकास परियोजनाएं आज उपेक्षा का शिकार हैं। उन्होंने कहा कि चाहे रोडवेज बस डिपो हो, औद्योगिक इकाइयां हों, महिला आईटीआई हो अथवा खेल स्टेडियम, अधिकांश स्थानों पर विकास कार्य ठप पड़े हैं। उन्होंने कहा कि जिस स्टेडियम में कभी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित होती थीं, वहां आज खिलाड़ियों को अभ्यास करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक समय था जब दूसरे राज्यों के शिक्षित युवा रोजगार के लिए काशीपुर आते थे, जबकि आज यहां के युवाओं को रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों का रुख करना पड़ रहा है।

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