
काशीपुर। कुंडेश्वरी स्थित समर स्टडी हॉल विद्यालय में उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के उपलक्ष्य में एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, प्रकृति संरक्षण एवं पारंपरिक विरासत से परिचित कराना था। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक पहाड़ी गीतों एवं लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ देकर सभी का मन मोह लिया। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सजे विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को हरेला पर्व के महत्व से अवगत कराया गया। उन्हें बताया गया कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हरियाली, पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति के प्रति सम्मान और समृद्धि का प्रतीक है। यह पर्व हमें अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा प्रकृति के संरक्षण का संदेश देता है। विद्यालय की अध्यक्षा श्रीमती मुक्ता सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत हमारी अमूल्य धरोहर है। नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं, भाषा और संस्कृति से जोड़ना समय की आवश्यकता है। वहीं प्रधानाचार्य श्री अनुज भाटिया ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने तथा हरेला पर्व के संदेश को जन जन तक पहुँचाने के लिए प्रेरित किया। इस कार्यक्रम में विद्यालय के उप प्रधानाचार्य मनु अग्रवाल, राजेंद्र फर्त्याल, नेहा पंत तथा समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का समापन प्रकृति संरक्षण एवं सांस्कृतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

जुगनू खान
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