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काशीपुर। डी-बाली ग्रुप की डायरेक्टर श्रीमती उर्वशी दत्त बाली ने देवभूमि के लोक पर्व हरेला के अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास में हिंदू वाहिनी संगठन के साथ पौधारोपण किया गया। इस अवसर पर बच्चों को केवल पौधे लगाने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदारी के साथ पालने और वृक्ष बनने तक उनकी देखभाल करने का
संकल्प भी दिलाया गया।

इस अवसर पर समाज सेविका उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि काशीपुर आने के बाद अब तक उन्हें 25,000 से अधिक पौधे लगाने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने बताया कि वे अपनी डी-बाली कंस्ट्रक्शन कंपनी के सभी प्रोजेक्ट्स की लैंडस्केपिंग स्वयं देखती हैं और हमेशा हरियाली को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं। उनका मानना है कि किसी भी शहर की पहचान केवल ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि उसके हरे भरे पेड़ों, स्वच्छ वातावरण और हरियाली से होती है।
उन्होंने कहा कि वर्षों पहले लगाए गए छोटे-छोटे पौधों को आज विशाल और घने वृक्ष के रूप में देखकर जो संतोष मिलता है, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। उन वृक्षों की छांव में लोगों को बैठते या उनके नीचे से गुजरते देखकर वही अपनापन महसूस होता है, जैसा एक मां को अपने बच्चे को बड़ा होते देखकर होता है। पौधों के साथ भी एक भावनात्मक रिश्ता बन जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति के बीच कुछ समय बिताने से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। हरियाली से भरा वातावरण व्यक्ति के व्यवहार, सोच और जीवनशैली पर भी सकारात्मक प्रभाव छोड़ता है। इसलिए प्रत्येक घर, विद्यालय और संस्थान में अधिक से अधिक पौधे लगाना समय की आवश्यकता है। पौधा एक छोटा-सा शब्द है, लेकिन उसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है।
बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वे पढ़ाई, खेल, मोबाइल और अन्य गतिविधियों के लिए समय निकालते हैं, उसी प्रकार हर वर्ष कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी स्वयं निभाएं। जब वही पौधा वर्षों बाद एक विशाल वृक्ष बनेगा, तब गर्व से कहा जा सकेगा—”यह पेड़ मैंने लगाया था।”
हरेला पर्व के अवसर पर लायंस क्लब, यूएसआर इंदु समिति पीरूमदारा स्थित दिव्यांग बच्चों के विद्यालय में भी पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया गया।
“पेड़ लगाना एक दिन का कार्य है, लेकिन उसे वृक्ष बनाना जीवनभर की जिम्मेदारी है।”

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