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काशीपुर। मां बाल सुंदरी देवी चैती मेला परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा का भक्तिमय वातावरण लगातार श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद प्रदान कर रहा है। कथा के छठे दिन व्यास पीठ से परम पूजनीय शीतल दीदी ने श्रद्धालुओं को सीता स्वयंवर और श्रीराम विवाह का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान पूरा परिसर जय श्रीराम के जयघोष और भक्ति भाव से गूंज उठा।
परम पूजनीय शीतल दीदी ने श्रीराम के जीवन चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने अपनी लीलाओं और आदर्श जीवन के माध्यम से संसार को कर्तव्य, मर्यादा, धैर्य, संयम, सत्य, त्याग और आज्ञा पालन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने जिस प्रकार विपरीत परिस्थितियों में भी मर्यादा और धर्म का पालन किया, वह मानव जीवन को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने मां सीता के चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के जीवन में माता सीता ने भी कदम से कदम मिलाकर उनका साथ दिया। सीता जी त्याग, समर्पण, धैर्य और नारी शक्ति की प्रतीक हैं। श्रीराम और सीता का विवाह केवल एक वैवाहिक प्रसंग नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में आदर्श दांपत्य, प्रेम, विश्वास और संस्कारों का प्रतीक माना जाता है।

गाजे-बाजे के साथ निकली राम बरात

कथा के दौरान श्रीराम विवाह प्रसंग को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। मुख्य यजमान एडवोकेट आनंद प्रधान सपत्नीक गाजे-बाजे के साथ भव्य राम बरात लेकर कथा स्थल पर पहुंचे। राम बरात के कथा स्थल पर पहुंचते ही वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारों के साथ बरात का स्वागत किया। राम बरात के स्वागत के दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भगवान श्रीराम के स्वरूप का अभिनंदन किया। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए। इस दौरान कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने विवाह उत्सव का आनंद लिया और भगवान श्रीराम तथा माता सीता के जयकारे लगाए। राम विवाह प्रसंग के दौरान कथा स्थल का माहौल पूरी तरह उत्सवमय रहा। श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ कथा का श्रवण किया। आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्थाएं की गई थीं। इस अवसर पर मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री, युवराज नरेंद्र चंद सिंह बाबा, युवरानी कामाक्षी सिंह, सोमेश्वर देवेंद्र यादव, कौशलेश गुप्ता, नीरज कांडपाल, अशोक नेहरू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम और माता सीता का स्मरण करते हुए सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की।

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