





बच्चों के समग्र विकास में भावनात्मक जुड़ाव, संवाद और अभिभावकीय सहयोग की भूमिका पर हुई चर्चा
काशीपुर, 23 सितंबर। द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल के अर्ली ईयर केंपस में बुधवार को पूर्व-नर्सरी एवं एलकेजी के विद्यार्थियों के अभिभावकों के लिए ‘दिशा 1.0’ अभिभावक शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “आज मेरे बच्चे को वास्तव में क्या चाहिए, ताकि वह कल बेहतर तरीके से आगे बढ़ सके?” रहा। कार्यक्रम के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों के शुरुआती वर्षों में उनकी भावनात्मक, सामाजिक एवं व्यवहारिक आवश्यकताओं को समझने तथा उनके सर्वांगीण विकास में परिवार और विद्यालय की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का उद्देश्य अभिभावकों और शिक्षकों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करते हुए बच्चों के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जागरूकता बढ़ाना रहा। इस दौरान विशेषज्ञों एवं विद्यालय प्रबंधन ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चे के प्रारंभिक वर्ष उसके व्यक्तित्व निर्माण की नींव तैयार करते हैं। ऐसे में बच्चों को केवल पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय उन्हें पर्याप्त समय, स्नेह, सुरक्षा, विश्वास और सकारात्मक वातावरण प्रदान करना आवश्यक है। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में श्रीमती दीपिका गुड़िया आत्रेय उपस्थित रहीं।

उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की महत्ता को और बढ़ाया। उन्होंने अभिभावकों के साथ बच्चों के विकास और उनकी आवश्यकताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर संवाद किया।
इस अवसर पर विद्यालय की निदेशक डॉ. वसुधा कपूर, संयुक्त प्रबंध निदेशक सुश्री कामाक्षी कपूर तथा अर्ली ईयर केंपस की प्रधानाचार्या श्रीमती विभा तिवारी ने अभिभावकों को बच्चों की आवश्यकताओं को समझने और उनके बेहतर विकास के लिए अपनाए जाने वाले व्यवहारिक तरीकों की जानकारी दी। वहीं जैतपुर परिसर की प्रधानाचार्या श्रीमती मीनल बधवार की गरिमामयी उपस्थिति भी रही।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों के साथ प्रभावी संवाद, भावनात्मक जुड़ाव, उनकी बातों को धैर्यपूर्वक सुनना, उनकी भावनाओं को समझना तथा उन्हें सुरक्षित एवं सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। अभिभावकों को बताया गया कि बच्चों के विकास में केवल शैक्षणिक उपलब्धियां ही महत्वपूर्ण नहीं होतीं, बल्कि उनका आत्मविश्वास, सामाजिक व्यवहार, भावनात्मक संतुलन और परिवार के साथ उनका संबंध भी उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वक्ताओं ने कहा कि प्रारंभिक आयु में बच्चे अपने आसपास के वातावरण और बड़ों के व्यवहार से बहुत कुछ सीखते हैं।

ऐसे में अभिभावकों का व्यवहार, बच्चों से बातचीत करने का तरीका और उनकी भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डालती है। बच्चों को हर समय निर्देश देने के बजाय उनकी बात सुनना, उनकी जिज्ञासाओं को समझना और उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देना उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायक होता है। कार्यक्रम में विद्यालय और परिवार के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया गया।

कहा गया कि जब अभिभावक और शिक्षक बच्चे की आवश्यकताओं, व्यवहार और प्रगति को लेकर आपस में निरंतर संवाद करते हैं, तो बच्चे को सीखने और विकसित होने के लिए अधिक अनुकूल वातावरण प्राप्त होता है।
‘दिशा 1.0’ के माध्यम से द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल ने अभिभावकों को बच्चों के शुरुआती वर्षों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने और विद्यालय तथा परिवार के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की।

कार्यक्रम में अभिभावकों ने भी सक्रिय सहभागिता करते हुए बच्चों के व्यवहार, भावनात्मक आवश्यकताओं और पालन-पोषण से जुड़े विषयों पर जानकारी प्राप्त की। विद्यालय प्रबंधन की ओर से कहा गया कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य अभिभावकों को केवल शैक्षणिक पक्ष से नहीं, बल्कि बच्चे के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास से जोड़ना है, ताकि विद्यालय और परिवार मिलकर बच्चों को बेहतर सीखने का वातावरण और मजबूत भविष्य की नींव प्रदान कर सकें।

जुगनू खान
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