
मेयर दीपक बाली के हस्तक्षेप के बाद कर्मचारियों ने शुरू किया काम, लापरवाह कंपनी का ठेका निरस्त करने के निर्देश
काशीपुर। घर-घर जाकर कूड़ा एकत्र करने वाले कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलने से नाराजगी का मामला रविवार को उस समय गरमा गया, जब डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का कार्य कर रही कंपनी एमएसडब्ल्यूएम (MSWM) के कर्मचारियों ने अपना आक्रोश जाहिर करते हुए महाराणा प्रताप चौक पर भारी मात्रा में कूड़ा डाल दिया। शहर के प्रमुख चौराहे पर कचरा जमा होने से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इससे यातायात व्यवस्था के साथ-साथ शहर की स्वच्छता व्यवस्था भी प्रभावित हुई। घटना की सूचना मिलते ही नगर निगम प्रशासन में हलचल मच गई मामले की गंभीरता को देखते हुए मेयर दीपक बाली स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल मौके पर बुलाकर कचरा हटवाने की व्यवस्था कराई। निगम के वाहनों की मदद से चौराहे पर पड़े कचरे को हटाने का कार्य शुरू कराया गया, ताकि आम जनता को आवागमन में परेशानी न हो और शहर की सफाई व्यवस्था जल्द सामान्य हो सके। इसके बाद मेयर ने नाराज कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। कर्मचारियों ने वेतन नहीं मिलने सहित अपनी अन्य समस्याएं उनके सामने रखीं। मेयर ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और उनकी जायज मांगों के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मौके पर मेयर दीपक बाली ने बताया कि शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का करीब 20 वर्ष का ठेका उनके महापौर बनने से पहले से चला आ रहा है। इस व्यवस्था के तहत कार्य करने वाली कंपनी एमएसडब्ल्यूएम को नगर निगम की ओर से चार दिन पहले ही भुगतान किया जा चुका है। इसके बावजूद कंपनी ने अपने अधीन कार्यरत कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं किया। इसी वजह से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी और उन्होंने विरोध स्वरूप महाराणा प्रताप चौक पर कचरा डाल दिया। मेयर ने कहा कि कर्मचारियों का नगर निगम से सीधे संबंध न होने के बावजूद वे शहर की सफाई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी मेहनत से ही घरों से कूड़ा उठाने और शहर को स्वच्छ रखने का कार्य होता है। उन्होंने कर्मचारियों को अपना परिवार बताते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मेयर दीपक बाली ने कर्मचारियों से बातचीत के दौरान उनसे शहर की जनता और स्वच्छता व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए काम दोबारा शुरू करने का अनुरोध किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों की जायज मांगों को लेकर संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मेयर के हस्तक्षेप और भरोसे के बाद कर्मचारियों ने अपना विरोध समाप्त करते हुए दोबारा काम शुरू कर दिया। इसके बाद कर्मचारी शहर में सफाई और घर-घर से कूड़ा उठाने के कार्य में जुट गए। मेयर दीपक बाली ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नगर निगम की ओर से भुगतान किए जाने के बाद भी यदि कंपनी अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं देती है तो यह गंभीर लापरवाही है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की दो-तीन जायज मांगों को भी सुना गया है और उनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। मेयर ने एमएसडब्ल्यूएम कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा नियमानुसार उसका ठेका निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नई निविदा प्रक्रिया शुरू करने की बात भी कही गई है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो और सफाई व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित होती रहे। मेयर दीपक बाली ने स्पष्ट किया कि शहर की सफाई व्यवस्था नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसी भी कंपनी की लापरवाही का खामियाजा शहर की जनता को नहीं भुगतना पड़ेगा। कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलना चाहिए और उनसे काम लेने वाली कंपनी को अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम शहर की स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है और इसमें लापरवाही बरतने वाली एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कठोर कदम उठाए जाएंगे। महाराणा प्रताप चौक पर हुए इस घटनाक्रम ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था और ठेका कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि नगर निगम की ओर से कंपनी का ठेका निरस्त करने की प्रक्रिया कितनी जल्द पूरी की जाती है और कर्मचारियों की वेतन संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान किस प्रकार किया जाता है।

जुगनू खान
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